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बीएएमएस छात्रों की कॉपियों की होगी डिकोडिंग, अब खुलेंगे बड़े-बड़े राज

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झांसी। बीएएमएस छात्रों की कॉपियों में ‘हैश टैग’ का चिह्न बनाकर नंबर बढ़ाने के खेल का बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा भंडाफोड़ करने के बाद हड़कंप की स्थिति है। जल्द ही बीयू कॉपियों की डिकोडिंग कराएगा। इसके बाद साफ हो पाएगा कि नंबर बढ़ाने के खेल में कौन कॉलेज और कौन छात्र-शिक्षक शामिल हैं। वहीं, कुलपति ने भी साफ कह दिया है कि इस प्रकरण में आरोपी बक्शे नहीं जाएंगे।
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बुंदेलखंड में नंबर बढ़ाने का बड़ा खेल सामने आया है। झांसी में एक सरकारी, एक प्राइवेट, बांदा में एक सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में पढ़ने वाले बीएएमएस प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष के छात्र-छात्राओं की फरवरी-मार्च में परीक्षा हुई थी। मई में मूल्यांकन कराया गया। मूल्यांकन के दौरान ही बीयू अधिकारियों को नंबर बढ़ाने के खेल की सूचना मिल गई थी। मगर इसे गोपनीय रखा गया। मूल्यांकन के बाद जब पड़ताल कराई गई तो सिलसिलेवार खुलासा हुआ। बीयू अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय में इन तीनों कॉलेजों की 3200 कॉपियां जमा हुईं। इनमें से 500 कॉपियों के पहले पन्ने पर ही ‘हैश टैग’ चिह्न बना हुआ था। मामला संज्ञान में आने के बाद बीयू ने इन कॉपियों का रिजल्ट रोक दिया है। यह मामला सामने आने के बाद से हड़कंप की स्थिति है। चूंकि, कॉपियों में कोडिंग सिस्टम लागू है। इसके तहत कॉपियां जमा होने के बाद ही इसमें नाम, रोल नंबर आदि छात्र की पहचान वाली डिटेल हटाकर बार कोड लगा दिया जाता है। हर कॉपी को एक कोड नंबर भी दर्ज होता है। इसी कोड नंबर से कॉपी की पहचान होती है। चूंकि, ‘हैश टैग’ चिह्न वाली कॉपियां की भी कोडिंग है, ऐसे में ये पता नहीं चल पा रहा है कि ये 500 कॉपियां कितने छात्रों और किस कॉलेज की हैं। इसके लिए इन कॉपियों की डिकोडिंग की जाएगी। इसके लिए संबंधित एजेंसी को बार कोड स्कैन कराकर सभी कॉपियों की डिटेल निकलवाई जाएगी। इससे परत-दर-परत मामला खुलता चला जाएगा।
...तो कैसे डॉक्टर बनते ये छात्र
हैश टैग प्रकरण ने सिस्टम पर तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस किसी को भी इस मामले की जानकारी हुई, उसके मुंह से बस एक ही बात निकली कि बीएएमएस छात्रों को तो आगे चलकर डॉक्टर बनना पड़ता है। यदि इन्हीं को नंबर बढ़ाकर पास करने का खेल चल रहा है तो ये डॉक्टर बनने के बाद मरीजों का कैसा इलाज करेंगे?
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यह गंभीर मामला है। एक-दो दिन में कमेटी का गठन कर दिया जाएगा। कॉपियों की भी डिकोडिंग कराई जाएगी। इससे साफ हो जाएगा कि 500 कॉपियां लिखने वाले कितने छात्र हैं और किस कॉलेज का ये मामला है। प्रकरण में जो भी आरोपी मिलेगा, उन्हें बक्शा नहीं जाएगा। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।
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