अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बीयू कैंपस में संचालित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के करीब 850 विद्यार्थी दूषित पानी पी रहे हैं। महीनों से खुली आईआईटी की टंकियों में काई की मोटी परत और लार्वा है। छात्रों ने बताया कि पानी में इतनी दुर्गंध हैं कि हाथ तक नहीं धो सकते। छात्र-छात्राओं के लिए दूषित पानी है, जबकि अधिकारी ब्रांडेड पानी पीते हैं।
आईईटी की छत पर करीब 8 पानी की टंकियां रखी हुई हैं। इनमें महीनों से ढक्कन नहीं लगा है। टंकियों की सफाई भी नहीं हुई है। टंकियों में काई की मोटी परत रहती है। लार्वा भी काफी पनप रहा है। आईईटी के सूत्रों की कहना है कि जिस समय नैक के लिए टीम आई थी, उस समय भी जिम्मेदार अधिकारियों से ढक्कन लगाने के लिए कहा था मगर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद करीब पांच बार ढक्कन लगवाने और टंकियों की सफाई करने के लिए पत्र संपत्ति विभाग को भेज चुके हैं मगर कोई सुनवाई नहीं होती।
छात्र-छात्राओं ने बताया कि पूरी बिल्डिंग के अंदर आने वाला पानी सिर्फ शौचालय में इस्तेमाल करने योग्य हैं। नलों को खोलने पर पानी इतना ज्यादा खराब होता है कि मुंह में रखते ही उलटना पड़ता है। कैंपस के अधिकांश विभागों की छतों पर रखी टंकियों की यही स्थिति है।
टंकी की सफाई के लिए तीन माह पहले संपत्ति विभाग को पत्र लिखा था। अब स्टाफ से पता करूंगा कि सफाई हुई या नहीं हुई। - प्रो. एमएम सिंह, डीन, आईईटी, बीयू
हर तीन माह में पानी की टंकी की सफाई कराई जाती है। टंकी के ढक्कन हवा की वजह से उड़ जाते हैं। इसके लिए टीम लगी हुई हैं, जो रिपोर्ट करती हैं। - प्रो. डीके भट्ट, निदेशक आईईटी एवं संपत्ति अधिकारी बीयू