झांसी। बुंदेलखंड में पढ़े-लिखे युवाओं में बांझपन तेजी से बढ़ रहा है। इसमें सिर्फ पुरुष ही नहीं महिलाएं भी शामिल हैं। गायनेकोलॉजिस्ट एवं बांझपन विशेषज्ञों सहित आईवीएफ सेंटरों में ऐसे केस लगातार पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 50-60 लोगों की ओपीडी में रोज ऐसे 8 से 10 केस आ रहे हैं। डॉक्टर बता रहे हैं कि पुरुषों के शुक्राणु भी कम हो रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन ट्रीटमेंट) को टेस्ट ट्यूब बेबी के नाम से भी जाना जाता है।। इसमें आईवीएफ ट्रीटमेंट की सुविधाओं से लैस एक प्रयोगशाला में नियंत्रित समय एवं परिस्थितियों में महिला के अंडों और पुरुष के शुक्राणु (स्पर्म) को मिलाया जाता है और पांच दिन में भ्रूण तैयार कर महिला के गर्भाशय में रखा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ती बांझपन की समस्या के कारण कहीं महिला तो कहीं पुरुष और कहीं दोनों में दिक्कत के चलते गर्भधारण नहीं हो पा रहा है। झांसी में आईवीएफ ट्रीटमेंट की सुविधा से लैस खुले पांच से अधिक हॉस्पिटल हैं। नव दंपती बच्चे की आस में आईवीएफ ट्रीटमेंट की तरफ बढ़ रहे हैं।
बांझपन बढ़ने के ये हैं बड़े कारण
-टीबी होना : इससे पुरुषों में कई बार शुक्राणु बनने में समस्या आती है। महिलाओं में गर्भाशय में भी संक्रमण होता है।
-बच्चेदानी खिसकना : विपरीत परिस्थितियों में लगातार बैठे-बैठे काम करना, बीमारी या अन्य कारणों से समस्या बढ़ रही।
-अधिक उम्र में शादी : शादियां 30 से 35 साल में हो रही हैं। ऐसे में दो-तीन साल बाद बच्चा होने में दिक्कत हो रही।
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केस-1
कम उम्र में शुरू हो रहा पीरियड, जल्दी हो रहा मीनोपॉज
नौ साल की बच्ची को मिनार्की (पहला पीरियड) का केस डॉक्टर के पास पहुंचा है। छोटी उम्र से ही लड़कियों की लाइफ स्टाइल में काफी बदलाव होने से पीरियड आने की उम्र कम हुई है। जबकि भागमभाग लाइफ और तनाव के चलते मीनोपॉज (पीरियड खत्म होना) भी हो रहा।
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केस-2
शहर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में पहुंचे दंपती ने शादी के तीन साल बाद भी डॉक्टर को बच्चा न होने की बात बताई। जांच में पता चला कि पति-पत्नी की उम्र 35 वर्ष से अधिक है। वजन भी अधिक है। दोनों में बांझपन के लक्षण मिले।
दोनों के फोटो
बुंदेलखंड के पुरुषों में शुक्राणु कम होने या शुक्राणु बनने में दिक्कत के केस बढ़ रहे हैं। महिलाओं में भी अंडे कम बनने की समस्या आ रही है। 100 में से 20-25 फीसदी केस इसी तरह के आ रहे हैं जिनमें गर्भधारण नहीं हो पा रहा है। इससे आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए लोगों और उनके परिवारों की झिझक टूटी है। जो ट्रीटमेंट पर पैसा खर्च कर सकते हैं, वह आईवीएफ के जरिए बच्चा पैदा कर रहे हैं। अब तो लोग डोनेट किए गए अंडे या शुक्राणु लेने के लिए भी तैयार हो रहे हैं।
डॉ. भाविका सिंह, गायनेकोलॉजिस्ट एवं आईवीएफ कंसल्टेंट
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ओपीडी में महीने में 20 से अधिक ऐसे केस आते हैं जिन्हें बच्चा नहीं हो रहा है। अधिक उम्र में शादी, दिन भर बैठकर करने वाला जॉब, मोटापा भी इसका बड़ा कारण है। इन केसों में ट्रीटमेंट के बाद भी गर्भधारण नहीं होता तो ये आईवीएफ के जरिए बच्चा पा रहे हैं। पति-पत्नी दोनों बेझिझक बांझपन का इलाज भी करा रहे हैं।
डॉ. सुरक्षा शुक्ला-ओबेसिटी, गायनेकोलॉजिस्ट एवं बांझपन कंसल्टेंट