mahal. jhansi news
- फोटो : demo
अगर शासन ने पुरातत्व विभाग का प्रस्ताव मान लिया तो आने वाले दिनों में बरुआसागर किले में टिकट लेकर ही पर्यटक प्रवेश कर सकेंगे। पुरातत्व विभाग ने आय बढ़ाने के लिए शासन को यहां टिकट लगाने का प्रस्ताव भेजा है। इस किले को देखने के लिए हर महीने करीब एक हजार पर्यटक आते है। इसे रात में सौर उर्जा से रोशन करने की भी योजना है।
झांसी-खजुराहो राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित 17 वी शताब्दी का यह किला पर्यटकों में पहचान बनाता जा रहा है। यही कारण है कि राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इस किले में केंद्र व राज्य सरकार ने कई कार्य कराए। इनमें फसाड लाइटें, उच्च स्तरीय टॉयलेट, पर्यटकों के बैठने को बैंच, उद्यान आदि है। पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे ने बताया कि पर्यटकों से टिकट लेने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसमें भारतीय पर्यटकों से 10 रुपये, जबकि विदेशी पर्यटकों से टिकट दर भारत सरकार निर्धारित करेगी। टिकट की धनराशि बरुआसागर नगर पालिका के खाते में जाएगी। ताकि वह किला में बिजली क ा खर्चा वहन कर सके। इसके अलावा किला में नगर पालिका द्वारा सौर ऊर्जा का प्लांट लग रहा है। इससे फसाड लाइट जोड़ी जाएगी।
राजा उदित सिंह ने कराया था निर्माण
बरुआसागर झील के तट पर बना है किला। इसका निर्माण बुंदेला राजा उदित सिंह ने 1689 से 1736 के मध्य कराया था, जो 2.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फै ला है। किले के मध्य में 30 मीटर ऊंचा राजमहल है, जिसे पंचमहल कहते है। बाद में यह किला मराठा शासकों के अधीन आ गया था। झील के किनारे बने इस किले का उपयोग मराठा शासक गर्मियों में निवास के लिए करते थे।