झांसी। ठंड के बढ़ते ही जिले भर में ब्रेन स्ट्रोक के साथ ही सांस के मरीजों में भी इजाफा हो गया है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बीस से तीस मरीज सांस संबंधी बीमारी का इलाज कराने के लिए आ रहे है। इसके अलावा अस्पताल की इमरजेंसी में औसतन दो से तीन मरीज ब्रेन स्ट्रोक के आ रहे हैं।
मौसम में ठंडक होते ही ब्रेन स्ट्रोक का खतरा अधिक हो जाता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज कोमा की स्थिति में पहुंच जाता है। इसके अलावा लकवा होने का खतरा भी अधिक रहता है। वहीं ठंड का मौसम सांस के मरीजों के लिए भी काफी घातक होता है। इस मौसम में सबसे अधिक बुजुर्ग ही इस बीमारी का शिकार होते हैं। जिसके चलते जिला अस्पताल की ओपीडी में सांस के लगभग बीस से तीस मरीज इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। वहीं ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में भी दिन प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना दो से तीन ब्रेन स्ट्रोक के मरीज आ रहे हैं।
हर साल की तरह इस बार भी ठंडक होते ही ब्रेन स्ट्रोक के साथ ही सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी में सबसे अधिक मरीज सांस का इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। डॉ. डीएस गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन।