झांसी। कर्मचारियों की कमी के कारण राजकीय संग्रहालय की 14 में से आठ वीथिकाएं (गैलरी) बंद हैं। शासन की अनदेखी के कारण पर्यटक इनमें रखे प्राचीन युग के अनमोल सिक्के, बुंदेली लोक कला संस्कृति की झांकी, डाक टिकटों का संग्रह आदि से परिचित नहीं हो पा रहे हैं।
झांसी दुर्ग के समीप मौजूद राजकीय संग्रहालय में देश विदेश के पर्यटकों के अलावा शोधकर्ता एवं विद्यार्थी बुंदेलखंड की एतिहासिक पुरातत्व संपदा को देखने आते हैं। यहां छठवी-सातवीं शताब्दी से लेकर 19 वीं शताब्दी तक की कई बेशकीमती मूर्तियां, पांडुलिपियां, साहित्य, चित्र, अस्त्र-शस्त्र, स्वतंत्रता संग्राम की झांकियां आदि हैं, जिन्हें रखने के लिए संग्रहालय में 14 वीथिकाएं हैं। लेकिन इन वीथिकाओं के लिए सिर्फ एक वीथिका सहायक है। जबकि प्रत्येक वीथिका के लिए एक सहायक और एक परिचर होना चाहिए। वर्तमान में चार वीथिका परिचर है। इनका काम है पर्यटकों को जानकारी देना और साफ सफाई आदि की व्यवस्था रखना है। जानकारी के अनुसार बजट के अभाव में संग्रहालय में आउटसोर्सिंग पर भी कर्मचारी नहीं रखे जा पा रहे है। ऐसे में आठ वीथिकाएं बंद पड़ी हुई है।
संग्रहालय की उप निदेशक आशा पांडेय ने बताया कि कर्मचारियोें के अभाव के बारे में निदेशक को जानकारी दी गई हैं। उम्मीद है कि जल्द ही कर्मचारियों की व्यवस्था हो जाएगी।
ये हैं बंद
बंद पड़ी वीथिकाओं में टेरोकोटा वीथिका, लोककला वीथिका, 1857 क्रांति की वीथिका, डाक टिकट, वृंदावन लाल वर्मा वीथिका, लोककला वीथिका, सिक्का वीथिका व अन्य हैं।
17000 कलाकृतियां हैं
अद्भूत-एतिहासिक प्राचीन वस्तुओं का संग्रह स्थल राजकीय संग्रहालय की स्थापना 1978 में हुई थी। इसमें करीब 17000 कलाकृतियों का संग्रह है, जिनमें पाषाण मूर्तियां, धातु मूर्तियां, शिलालेख, ताम्रपत्र, सिक्के, मुहरे, चित्र, पांडुलिपियां, साहित्य है। इसके अलावा झांकियां भी है।