अबकी बार नगर निगम के चुनाव में सभी वार्डों के नक्शे बदल जाएंगे। यानि, अब तक पार्षद जिस वार्ड को अपना मान कर चल रहे थे, अब वह बदल जाएगा। अब उन्हें आसपास के वार्ड की जनता की सेवा करने का भी मौका मिलेगा।
वार्डों का परिसीमन 2011 की जनगणना के अनुसार किया गया है। शासन ने इसके लिए 12 अप्रैल तक का समय तय किया था। प्रमुख सचिव कुमार कमलेश के निर्देश आने पर नगर निगम के कर्मचारी आनन- फानन में इस कार्य में जुट गए। शहर की आबादी करीब पांच लाख पांच हजार है। शासनादेश में 2011 की जनगणना के हिसाब से सभी वार्डों का परिसीमन करने को कहा गया है, जबकि अभी तक शहर के वार्डों में जनसंख्या को लेकर काफी विसंगति थी। किसी वार्ड की जनसंख्या 6,601 थी तो मतदाता 6,400 थे। यह स्थिति किसी एक वार्ड की नहीं, बल्कि कई वार्डों में विसंगति थी। इस बात को ध्यान में रखते हुए परिसीमन किया गया। शहर में साठ वार्ड हैं। इसलिए कुल आबादी में साठ का भाग दिया गया तो जो भी शेष बचा उतनी आबादी प्रत्येक वार्ड में रखने का मानक बनाया गया। इसमें अधिकतम आबादी 9,692 तथा न्यूनतम 7,162 रखी गई। यदि 15 प्रतिशत आबादी कहीं कम या ज्यादा हो रही थी तो उसे भी काउंट कर लिया गया है।
आबादी का मानक तय होने के बाद सभी वार्डों का परिसीमन किया गया। इसमें से करीब - करीब सभी वार्ड के नक्शों में बदलाव हो गया है। अनुसूचित जाति के घटते क्रम में वार्डों की संख्या निर्धारित की गई है, इससे भी वार्डों का क्रम बदल गया है। अब तक पार्षद पद के प्रत्याशी किसी वार्ड को अपना कार्य क्षेत्र मानकर मेहनत कर रहे थे, लेकिन परिसीमन से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
कुछ इस तरह हुआ बदलाव
अभी परिसीमन पर शासन की मुहर लगनी बाकी है। लेकिन वार्डों का जो स्वरूप तैयार किया गया है, उसमें ज्यादातर वार्ड में दूसरे वार्डों के मुहल्ले शिफ्ट कर दिए गए हैं। जिस वार्ड में पार्टी विशेष की विचारधारा के समर्थक मतदाता अधिक थे, वह वार्ड संबंधित पार्टी के समर्थक मतदाताओं का वार्ड माना जाता था, लेकिन अब उसमें ऐसा मुहल्ला जुड़ गया है कि उसमें दूसरी पार्टी के मतदाताओं की बहुलता हो गई। इस कारण अब संबंधित दावेदार को जीत पाना आसान नहीं रहेगा। वहीं, कुछ पार्षद पद के दावेदार इसलिए खुश नजर आ रहे हैं, क्योंकि उनके वार्ड में आसपास के ऐसे मुहल्ले जुड़ गए, जो उनकी पार्टी के समर्थक मतदाता हैं।