झांसी। ब्लॉक प्रमुख की चुनावी तिथि भले अभी घोषित न हुई हो लेकिन, सीट हथियाने को रसूखदारों के बीच खींचतान छिड़ चुकी है। एक-एक बीडीसी सदस्य को पाले मेें मिलाने के लिए जोर-आजमाइश छिड़ी है। हालात यह है कि 599 बीडीसी सदस्यों में करीब तीस फीसदी सदस्य अज्ञातवास में चले गए हैं। इन सभी सदस्यों के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ हैं। परिवार वाले भी इनके बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं। हालांकि घर वाले कुछ भी कहें लेकिन यह सभी इस समय ब्लाक प्रमुख के दावेदारों के साथ हैं। किसी को हिल स्टेशन भेज दिया गया है तो किसी को बड़े शहरों में।
जिपं अध्यक्ष चुनाव के बाद अब सभी का फोकस ब्लॉक प्रमुख सीट पर है। अध्यक्ष पद पर बुरी तरह मात खाने के बाद सपा खेमा पलटवार करने की तैयारी में है। भाजपा नेता किसी कीमत पर अपनी बढ़त नहीं खोना चाहते। ऐसे में यहां दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की निगाह भी ब्लाक प्रमुख के पद पर टिकी हैं। राजनीतिक दलों की तैयारी सक्षम उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारने की है। इसी के चलते चुनाव घोषित होने से पहले सियासी जगत में हलचल तेज है। जनपद की आठ ब्लॉक प्रमुख सीट में सबसे अधिक 82 सदस्य बंगरा ब्लॉक में हैं। यहां 63 सदस्य पहली बार जीते हैं लेकिन, इनमेें तमाम सदस्य घरों से नदारद हैं। गुरसराय ब्लॉक में 71 बीडीसी सदस्य हैं। बताया जा रहा एक उम्मीदवार 75 हजार रुपये नकद के साथ सर्टिफिकेट जमा कराने का ऑफर खुलेआम दे रहा है। इसी तरह मोंठ ब्लॉक में 80 बीडीसी सदस्य हैं। इनमें भी कई सदस्य घर छोड़कर अज्ञात जगहों पर रह रहे हैं। परिजन भी चुप्पी साधे हैं। बबीना ब्लॉक में 82 बीडीसी सदस्य हैं। चिरगांव में 73 बीडीसी सदस्यों में एक उम्मीदवार की ओर से पहले ही 40 सदस्योें के सर्टिफिकेट रखवाए जा चुके। यहां के निर्वाचित बीडीसी सदस्य अब अज्ञात जगहों पर हैं। बड़ागांव में 56 एवं मऊरानीपुर में 85 बीडीसी सदस्यों के बीच भी लेकर काफी तेज जंग चल रही है।
- ढुरवाई द्वितीय से बीडीसी बृजकिशोर से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन, उनके परिजनों ने बताया कि बृजकिशोर बाहर गए हुए हैं। फोन उनका घर पर रखा है।
- सिलोरी सीट से निवार्चित बीडीसी भी घर पर नहीं हैं। सिंगार, इस्किल बुजुर्ग, अहरा, भसनेह, बंकापहाड़ी के सदस्यों के बारे में भी परिजनों को नहीं मालूम। फोन भी बंद हैं।
- लापता बताए जा रहे कई सदस्योें को विपक्षी खेमे में जाने से बचाने के लिए उम्मीदवारों ने खुद ही बाहर भेज दिया जबकि कई सदस्य इन स्थितियों को देखते हुए खुद ही अज्ञातवास में चले गए।