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ब्लैक फंगस के तीन संदिग्ध मरीज सामने आने के बाद बढ़ी सतर्कता

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झांसी। ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) के तीन संदिग्ध मरीज सामने आने के बाद अस्पतालों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। कोरोना वायरस से संक्रमित मधुमेह की मरीजों की निगरानी बढ़ा दी गई है। उनका मधुमेह का स्तर नियंत्रित रहे, इसके उपाय किए जाने लगे हैं। इसके अलावा मरीजों की मुंह, आंख, नाक, कान की नियमित जांच की व्यवस्था कर दी गई है।
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के अब तक तीन मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से बेहद कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है। ये दोनों ही मरीज वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे थे। हालांकि, अभी उक्त तीनों मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं हुई है। एमआरआई जांच में ब्लैक फंगस की आशंका पाई गई थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से तीनों मरीजों की बायोप्सी कर सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है। हालांकि, ब्लैक फंगस की बीमारी की आशंका के मद्देनजर मेडिकल कॉलेज में सतर्कता बढ़ा दी गई है। मधुमेह की बीमारी से ग्रस्त कोरोना रोगियों में मधुमेह का स्तर नियंत्रित करने के उपाय तेजी से किए जाने लगे हैं। इसके लिए इंसुलिन की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। इतना ही नहीं, मधुमेह रोगियों के साफ मास्क पहनने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही मास्क पहनने वाले हिस्से की नियमित जांच की जाने लगी है। नाक, कान, मुंह, आंखों के जरिये भी ब्लैक फंगस के शरीर में जगह बनाने का खतरा रहता है, जिससे शरीर के इन अंगों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है।
ऐसे होती है शुरुआत
झांसी। चिकित्सकों के अनुसार म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) अधिकतर कमजोर प्रतिरोधक क्षमता होने और मधुमेह स्तर बढ़ने पर प्रभाव डालता है। संदिग्ध मरीज की आंखों में लाली आना, सूजन, जलन और आंखों में पानी आता है। इसके बाद आंखें घूमना बंद कर देती हैं, धुंधलापन होने लगता है और आंख बाहर निकलने लगती है। लगातार अनदेखी करने पर आंखों की रोशनी भी जा सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि गंभीर परिस्थिति में संक्रमण से प्रभावित अंग को काटना भी पड़ सकता है।
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ये सावधानी है जरूरी
झांसी। मधुमेह के रोगियों को इस बीमारी से ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे में अपने मधुमेह स्तर को नियंत्रित रखें। प्रतिरोधक क्षमता को कम नहीं होने दें। पर्याप्त नींद लें। साथ ही लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेकर एमआरआई और सीटी स्कैन करवाएं।
मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के तीन संदिग्ध रोगी सामने आए हैं, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। दोनों ही वेंटिलेटर पर थे। ब्लैक फंगस की जांच के लिए नमूने भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आना बाकी है। एहतियातन उपाय शुरू दिए गए हैं। खासतौर पर कोरोना संक्रमित मधुमेह रोगियों की विशेष निगरानी की जा रही है। मधुमेह स्तर नियमित रहे, इसके उपाय किए जा रहे हैं। साथ ही ऊपरी सफाई का भी ख्याल रखा जा रहा है।
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- डॉ. रामबाबू, क्रिटिकल केयर इंचार्ज, मेडिकल कॉलेज, झांसी
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