जिले में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) का हमला तेज हो गया है। लगातार नए मरीज सामने आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में चार नए मरीजों में इस बीमारी की पुष्टि हुई है। अस्पताल में पहले से भर्ती दो मरीजों का सफल ऑपरेशन भी किया गया है।
कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहे झांसी में ब्लैक फंगस ने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। इस बीमारी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। अब तक आठ मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से चार मरीज बृहस्पतिवार को सामने आए। ये आंखों में दर्द, सूजन व सिर दर्द की शिकायत लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। आशंका होने पर चिकित्सकों ने इनकी एमआरआई जांच कराई, जिसमें ब्लैक फंगस पाया गया।
इसके अलावा बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के दो मरीजों का ऑपरेशन किया गया। चिकित्सकों की बारह सदस्यीय टीम ने ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. जितेंद्र यादव की अगुवाई में भगवंतपुरा निवासी प्रभुदयाल (50) और सकरार निवासी अरुण कुमार (35) का ऑपरेशन कर ब्लैक फंगस से संक्रमित नाक व आंख के हिस्से को दूर किया। दोनों मरीजों का ऑपरेशन करने में छह घंटे का वक्त लगा। ऑपरेशन सफल रहे।
मधुमेह रोगियों को बना रहा है शिकार
ब्लैक फंगस मधुमेह रोगियों को अपना शिकार बना रहा है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अब तक सामने आए ब्लैक फंगस के सभी मरीज मधुमेह की बीमारी से ग्रसित हैं और वे कोरोना वायरस के संक्रमण की भी चपेट में आ गए थे। कोरोना से मुक्त होने के बाद उनमें ब्लैक फंगस के लक्षण उभरे। ऑपरेशन से पहले चिकित्सकों को मरीज का मधुमेह स्तर नियंत्रित करना होता है।
50 इंजेक्शन मिले
झांसी। ब्लैक फंगस का इलाज महंगा होता है। रोगी के उपचार में छह से नौ इंजेक्शनों का उपयोग होता है, जिनकी कीमत लगभग दो लाख रुपये है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज में ये नि:शुल्क लगाए जा रहे हैं। झांसी को अभी 50 इंजेक्शन मिले हैं। इनमें 32 एंफोटेरेसिन-बी तथा 18 लाइपोसोमल हैं। इनमें से छह एंफोटेरेसिन-बी इंजेक्शन जालौन को दिए गए हैं। मेडिकल की ओर से और इंजेक्शनों की डिमांड भेजी गई है।