नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपना दबदबा कायम रखने में कामयाब रही। महापौर सीट पर कब्जा जमाने के साथ भाजपा ने अन्य पार्टियों के मुकाबले सबसे ज्यादा वार्डों में भी जीत दर्ज की। वहीं, बहुजन समाज पार्टी इस मामले में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से आगे रही। जबकि, पहली बार निकाय चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी का भी प्रदर्शन निराशाजनक रहा। चुनाव में निर्दलियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
नगर निगम बनने के बाद महापौर पद के लिए पहला चुनाव 2007 में हुआ था, जिसमें कांग्रेस के डा. बी लाल ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 2012 में भाजपा की किरण वर्मा ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली थी। नगर निगम पर अपना कब्जा कायम रखने के लिए भाजपा ने यह चुनाव भी पूरी ताकत के साथ लड़ा। भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पार्टी के कई बड़े पदाधिकारी शहर में डेरा डाले रहे। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की भी जनसभाएं हुईं। इसका नतीजा भी सामने है। भाजपा के रामतीर्थ सिंघल ने 77,046 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की है। हालांकि, वार्ड उसके हाथ 60 में से सिर्फ 21 ही लगे, लेकिन इस मामले में भी उसका प्रदर्शन अन्य पार्टियों से कहीं बेहतर रहा।
भाजपा को महापौर पद पर बहुजन समाज पार्टी ने कड़ी टक्कर मिली। मतगणना के शुरुआती चक्रों में बसपा के बृजेंद्र व्यास भाजपा से आगे बने रहे। बाद के चक्रों में वह हारे। बसपा प्रत्याशी ने 60,673 वोट हासिल किए। बसपा ने 11 वार्डों पर कब्जा जमाया। कांग्रेस का प्रदर्शन बदतर रहा। कांग्रेस के महापौर पद के प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। उन्हें केवल 36,083 वोट मिले। इसके अलावा केवल छह वार्डों में ही कांग्रेस अपने पार्षद जिता सकी। समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। सपा के महापौर प्रत्याशी राहुल सक्सेना 14,296 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे। सपा के पार्षद भी सिर्फ तीन जीते। पहली बार निकाय चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। आप के महापौर पद के प्रत्याशी नरेंद्र झा महज 7,284 वोट ही पा सके। पार्टी को केवल दो वार्डों में ही जीत हासिल हुई। वहीं, सभी राजनीतिक दलों को पीछे छोड़ते हुए शहर के 17 वार्डों में जीत हासिल कर निर्दलियों ने अपना दबदबा दिखाया। इनमें से कई प्रत्याशी पार्टियों से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे थे।