भारतीय जनता पार्टी 27 साल बाद इस बार मऊरानीपुर विधानसभा सीट पर नए चेहरे के साथ मैदान में उतरेगी। पार्टी 1989 से प्रागीलाल अहिरवार को अपना उम्मीदवार बना रही थी, लेकिन इस बार उन्होंने बसपा का दामन थामकर भाजपा के खिलाफ ही कमर कस ली हैं। उन्होंने भाजपा को तीन बार जीत दिलाई थी। इस बार पार्टी के लिए जिताऊ प्रत्याशी खड़ा करना चुनौती है। भाजपा ने मऊरानीपुर को ए-ग्रेड की सीटों में रखा है, जहां उसे सबसे अधिक जीत की उम्मीद है।
मऊरानीपुर विधानसभा क्षेत्र (सुरक्षित) में 1977 से अब तक के चुनावी रुझानों पर नजर डालें तो यहां की जनता कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस को वोट देती रही है। हार के बाद भी अंतर ज्यादा बड़ा नहीं रहा। 1977 में जनता पार्टी के प्रेमनारायण अहिरवार ने 29,403 मत पाकर कांग्रेस के भागीरथ चौधरी को 738 वोटों से हराया था। भागीरथ को 28,665 वोट मिले थे। 1980 में भारतीय जनता पार्टी ने प्रेम नारायण को उम्मीदवार बनाया, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया और पार्टी 6,107 मत पाकर तीसरे स्थान पर खिसक गई। कांग्रेस के भागीरथ चौधरी को रिकार्ड 33,660 वोट मिले। 1984 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने दुबारा प्रेमनाराण अहिरवार को प्रत्याशी बनाया, लेकिन पार्टी को इस बार भी हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, वोटों का अंतर बहुत कम रहा। भाजपा प्रत्याशी 18,456 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें कांग्रेस के भागीरथ चौधरी ने 5,944 वोटों से हराया।
इसके बाद पार्टी ने चेहरा बदलने का निर्णय ले लिया। 1989 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पहली बार प्रागीलाल अहिरवार को मौका दिया और उन्होंने 49,306 वोट पाकर रिकार्ड जीत हासिल की। प्रागीलाल ने वर्ष 1991 के चुनाव में भी जीत का सिलसिला जारी रखा और कांग्रेस उम्मीदवार बिहारी लाल आर्य को पटखनी दी। हालांकि, जीत का अंतर मात्र 96 वोटों का रहा था। प्रागीलाल को 32,058 व बिहारी लाल को 31,962 वोट मिले थे। वर्ष 1993 के चुनाव में जहां राम मंदिर लहर में भाजपा की झोली में प्रदेश की एक-एक कर सीटें आ रही थीं, वहीं मऊरानीपुर की जनता ने भाजपा उम्मीदवार को नकार दिया।
इस चुनाव में भाजपा के प्रागीलाल 43,352 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के बिहारीलाल को 49,368 वोट प्राप्त हुए थे। वर्ष 1996 के चुनाव में पार्टी ने प्रागीलाल पर फिर विश्वास जताया, लेकिन उन्हें फिर हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस बार भी हार का अंतर कम था। कांग्रेस के बिहारी लाल आर्य ने 46,963 वोट पाकर प्रागी लाल को 851 वोटों से हराया। प्रागीलाल को 46,082 वोट मिले थे।
प्रागीलाल को बार-बार टिकट देने के कारण पार्टी में उनके खिलाफ विरोध की चिंगारी पनपने लगी, लेकिन इसके बाद भी पार्टी ने वर्ष 2002 में एक बार फिर उन पर भरोसा जताया। लेकिन, चुनाव परिणाम ने सभी को शांत कर दिया। प्रागीलाल अहिरवार ने 36,267 वोट पाकर एक बार फिर मऊरानीपुर में भाजपा का परचम फहराया। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के बिहारी लाल को 33,942 वोट मिले। वर्ष 2007 में प्रागी लाल पार्टी को जीत न दिला सके। इस चुनाव में पहली बार बहुजन समाज पार्टी के भगवती प्रसाद सागर को जीत हासिल हुई।
भगवती को 46,330 वोट व तीसरे नंबर पर रहे प्रागी लाल को 32,969 वोट मिले थे। 2007 के चुनाव में एक बार फिर पार्टी ने प्रागीलाल अहिरवार पर भरोसा जताया है, लेकिन उनको हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में वे तीसरे नंबर पर रहे। कुछ समय पहले उनका पार्टी से मोहभंग हो गया और उन्होंने पार्टी बदलकर बसपा का दामन थाम लिया। इस बार पार्टी के लिए विधानसभा में नए चेहरे पर दांव लगाना चुनौती बना हुआ है। इस सीट पर पांच दावेदार हैं, जिसमें कांग्रेस छोड़कर आए पूर्व मंत्री बिहारी लाल आर्य भी शामिल है। अन्य दावेदारों में डॉ. रमेश श्रीवास, अनिल राज, पवन गौतम और देवकी नंदन श्रीवास शामिल है।
हम जीतेंगे
भाजपा मऊरानीपुर सीट पर मजबूत प्रत्याशी उतारेगी। पार्टी किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है। इस बार भाजपा इस सीट पर परचम लहराएगी।
संजय दुबे
(जिलाध्यक्ष भाजपा)