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बेतवा से जुड़ी नहरें शुरू, बाकी में अगले हफ्ते से आएगा पानी

Sat, 15 Oct 2016 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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betwa news jhansi - फोटो : demo
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रबी की फसलों के लिए खेत तैयार करने के लिए बेतवा नदी से जुड़ी नहरों ने पानी छोड़ दिया गया है। बाकी की नहरें 22 अक्तूबर से चालू होंगी, इनमें नवंबर के दूसरे सप्ताह तक पानी छोड़ा जाएगा। सिंचाई विभाग ने रबी की फसल में पलेवा से लेकर अंतिम सिंचाई तक के लिए 77 दिन नहरें चलाने का रोस्टर तैयार कर लिया है।
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बेतवा नहर प्रणाली में माताटीला बांध से पानी छोड़ा जाता है। यह पानी सुकवां-ढुकुवां व पारीछा बांध से आगे बढ़ने के बाद बेतवा नदी से जुड़ी नहरों की मदद से जालौन व हमीरपुर तक पहुंचता है। बेतवा नहर प्रणाली से बेतवा मुख्य नहर, भांडेर माइनर, सिमरिया, बरल माइनर, सिमरिया, अम्मरगढ़ रजवाह, पसैया माइनर, मोंठ रजवाह, चिरगांव माइनर, सुलतानपुर माइनर, नदेशिया माइनर, मोड़कला माइनर, बकुंवा माइनर, तालौड़ रजवाह, शाहजहांपुर माइनर, काडौर माइनर, चंदरौल माइनर आदि जुड़ी हुई हैं।
किसानों की मांग पर अभी सिंचाई विभाग चार अक्तूबर से धान की फसल के लिए नहरों का संचालन कर रहा था। पारीछा बांध से पांच सौ क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। अब शुक्रवार से निर्धारित रोस्टर के हिसाब से नहरों का संचालन शुरू कर दिया गया है। पहले चरण में 14 नवंबर तक नहरें चलाई जाएंगी। दूसरे चरण में पांच से 25 दिसंबर तक व तीसरे चरण में नौ से 15 जनवरी तक नहरों का संचालन होगा। वहीं, पहूंज, बड़वार, गढ़मऊ, गुरसराय नहर प्रणाली में 22 अक्तूबर से पानी छोड़ा जाएगा। बेतवा नहर प्रणाली के अधिशासी अभियंता हर्षेंद्र गुप्ता ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर गुरसराय नहर प्रणाली में 22 अक्तूबर से पहले भी पानी छोड़ा जा सकता है।
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ये सावधानियां बरतें  किसान 
- सिंचाई के पूर्व गूलों की सफाई करें। 
- पानी उचित गहराई में ही छोड़ेें।
- पानी देने के बाद कुलावा बंद कर दें।
- पानी न मिलने अथवा नहरों से खांदी कटिंग होने पर अवर अभियंता, सींचपाल अथवा किलेदार को सूचित करें।

ये न करें किसान 
नहर न काटें, बंधा न लगाएं, कुलावों के स्थान में परिवर्तन न करें, नहर की सड़क पर बैलगाड़ी, ट्रैक्टर बिना पूर्व अनुमति के ले जाना दंडनीय है।

बिना सफाई की चली नहरें
बेतवा से जुड़ी नहरों से तीस हजार हेक्टेअर भूमि सिंचित होती है। बिना सफाई के नहरें चलने पर कट, टूटे झाले, टूटे हेड व दोनों ओर पट्टियों के नहीं बनने से पानी निकलने में समस्या आएगी। इससे टेल के किसानों को लाभ नहीं मिल पाता है। हालांकि, सिंचाई विभाग के अफसरों का कहना है कि जिस अवधि में पानी को बंद किया जाएगा, उसमें नहरों की सफाई का काम हो जाएगा। अभी गुरसराय, गढ़मऊ, बड़वार व पहूंज नहर प्रणाली से जुड़ी नहरों की सफाई कराई जा रही है।
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