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150 करोड़ से सुधरेगी बुंदेलखंड की लाइफ लाइन बेतवा कैनाल

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झांसी। बुंदेलखंड की लाइफ लाइन मानी जाने वाली यूपी की सबसे पुरानी नहर बेतवा कैनाल की दशा सुधारी जाएगी। सरकार ने उप्र वाटर सेंटर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट के तहत इस नहर परियोजना को दुरुस्त करने की कवायद शुरू की है। करीब दो हजार किलोमीटर से अधिक लंबी इस कैनाल की दशा सुधारने में 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें विश्व बैंक भी मदद देगा। यह काम होने के बाद अगले सौ साल तक काम करने लायक बनी रहेगी।
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झांसी में पारीछा और सुकुवां-ढुकुवां डैम बनने केबाद खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए वर्ष 1886 में पारीछा से बेतवा कैनाल निकली थी। बेतवा नहर प्रखंड के एक्सईएन उमेश कुमार के मुताबिक उस समय परियोजना पर कुल 39 लाख रुपये खर्च हुए। पारीछा से नीचे मोंठ के पुलिया गांव तक करीब तीस किलोमीटर में मुख्य नहर उतरी। उसके बाद सब ब्रांच से इसका पानी जालौन, हमीरपुर के दूर-दराज इलाकों तक पहुंचा।
पिछले करीब 140 साल से यह परियोजना इस इलाके के लाखों किसानों की लाइफ लाइन बनी है। सूखे के समय रबी की फसल इसी कैनाल के सहारे ही होती है। पूरी नहर का ढांचा आज भी अंग्रेजों के जमाने का है लेकिन, समय के साथ इसका संचालन आसान नहीं रह गया। सैकड़ों साल पुराने होने से जगह-जगह कैनाल नष्ट हो गई। संचालन में इस्तेमाल होने वाले रेगुलेटर भी पुराने पड़ चुके हैं। इस वजह से पूरे कैनाल की नए सिरे से मरम्मत कराने की जरूरत महसूस की जा रही थी। सिंचाई विभाग की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था। शासन ने इसे मंजूर करते हुए इस काम को मंजूर कर लिया। अब सिंचाई अभियंता पूरे कार्य का खाका खींचने में जुटे हैं। एक्सईएन उमेश कुमार के मुताबिक डीपीआर तैयार करके काम शुरू कराया जाएगा। इसके बाद नहर का संचालन आधुनिक तरीके से किया जा सकेगा।
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विशालकाय नदी की तरह बहती है नहर
यूपी की सबसे विशालकाय नहरों में बेतवा कैनाल भी शामिल है। बुंदेलखंड के पूरे इलाके में सबसे अधिक जमीन इसी कैनाल से सिंचित होती है। रबी सीजन में नहर खुलने पर इससे 5000 क्यूसिक पानी प्रति सेकेंड गुजरता है। कई इलाकों में यह नहर विशालकाय नदी की तरह दिखाई पड़ती है।
अंग्रेजों के जमाने के लगे हैं रेगुलेटर
अंग्रेजों के जमाने की बनी इस कैनाल में समय के साथ कई सुधार कार्य हुए लेकिन, पानी नियंत्रित करने के लिए लगाए गए नौ में पांच रेगुलेटर अभी भी अंग्रेजों के जमाने के ही हैं। इनके माध्यम से ही पानी नियंत्रित होता है। सिंचाई अभियंताओं का कहना है कि यह रेगुलेटर मामूली मरम्मत कराने के बाद आज भी ठीक से काम करते हैं।
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