झांसी। बुंदेलखंड में इस बार मानसून दगा देता नजर आ रहा है। इस बात की तस्दीक अब तक हुई बारिश के आंकड़े कर रहे हैं। क्षेत्र के सात जिलों में से छह बारिश के सामान्य आंकड़े को नहीं छू पाए हैं। जबकि, मानसूनी सीजन अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। झांसी में सामान्य से लगभग आधी वर्षा हुई है। अन्य जिलों का भी कमोबेश यही हाल है। केवल बांदा जनपद पर ही इस बार मेघ मेहरबान हुए हैं।
बुंदेलखंड में मानसूनी सूजन 15 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस बार जून और जुलाई सूखे ही गुजर गए। अगस्त के दूसरे पखवाड़े में जरूर अच्छी बारिश हुई। जबकि, सितंबर का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है और मेघ रूठे हुए हैं। इसी का नतीजा है कि बांदा को छोड़ क्षेत्र के बाकी सभी जनपद अभी भी बारिश को तरस रहे हैं। सिंचाई विभाग के अनुसार बांदा में अब तक 988 मिमी बारिश हो चुकी है, जबकि यहां बारिश का सामान्य आंकड़ा 833 मिमी है। झांसी में बारिश के सामान्य आंकड़े 825 मिमी के सापेक्ष महज 421 मिमी ही बारिश हुई है। ललितपुर में 914 के मुकाबले 545 और जालौन जिले में 619 मिमी के सापेक्ष सिर्फ 245 मिमी बारिश ही अब तक हुई है। कमोबेश यही स्थिति चित्रकूट धाम मंडल के महोबा, हमीरपुर व चित्रकूट जिले में बनी हुई है। महोबा में 805 मिमी के सापेक्ष 545, हमीरपुर में 805 के मुकाबले 634 और चित्रकूट जिले में बारिश के सामान्य आंकड़े 830 मिमी के सापेक्ष 412 मिमी बारिश ही अब तक हुई है।
यह स्थिति तब है जब मानसूनी सीजन अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में यदि अच्छी बारिश नहीं हुई तो भूगर्भ जल का स्तर तो नीचे जाएगा ही, साथ ही खरीफ की फसल को नुकसान हो सकता है। खासतौर पर मूंगफली को अभी पानी की आवश्यकता है। इसके अलावा रबी की बुवाई के लिए मिट्टी में नमी होना जरूरी होता है।
बुंदेलखंड में मानसूनी सीजन 15 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस साल अब तक हुई बारिश सामान्य आंकड़े को नहीं छू पाई है। फिलहाल आगामी दिनों में अच्छी बारिश का पूर्वानुमान भी नहीं है। हालांकि, उम्मीद है कि जाते-जाते मानसून अच्छी बारिश देकर जाएगा। कम बारिश की वजह से खरीफ की फसल प्रभावित हो सकती है। रबी की बुवाई के लिए अच्छी बारिश की आवश्यकता है।
- डॉ. मुकेश चंद्र, वरिष्ठ वैज्ञानिक - कृषि मौसम विज्ञान केंद्र
मप्र के पानी से भर गए बांध
झांसी। मध्य प्रदेश में हुई अच्छी बारिश से क्षेत्र के बांध भर गए हैं। बुंदेलखंड की गंगा कही जाने वाली बेतवा नदी मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर आती हैं। बेतवा में अच्छा पानी आने की वजह से राजघाट बांध, माताटीला बांध, सुकुवां-ढुकुवां व पारीछा बांध अपनी क्षमता के अनुसार भर चुके हैं। इस पानी से आगामी एक साल के लिए पेयजल का संकट तो नहीं रहेगा, लेकिन पर्याप्त बारिश न होने की वजह से सिंचाई में समस्या पैदा हो सकती है।