झांसी। अदालत में पेशी के बाद जैसे ही पुजारी राधारानी और बिहारी जी को गाजे-बाजे के साथ लेकर पृथ्वीपुर कसबे में पहुंचे तो प्राचीन बिहारी जी मंदिर उत्सव में डूब गया। निवाड़ी न्यायालय से आते समय करीब बीस किलोमीटर के क्षेत्र में जो भी गांव पड़ा लोगों ने भगवान के विमान को रोककर उनकी पूजा अर्चना की। भगवान की अगवानी के लिए हजारों भक्त जुटे। हर तरफ राधे-राधे की गूंज थी। मंदिर में तो देर रात तक भजन कीर्तन का सिलसिला चलता रहा।
दरअसल ग्यारह साल पुराने चोरी के मामले में साक्ष्य के लिए निवाड़ी अदालत में भगवान की मूर्तियों के ले जाया गया था। भगवान करीब दो घंटे तक कोर्ट में रहे थे। पेशी के बाद भगवान को वापस मंदिर लाया गया। मंदिर के गर्भगृह में भगवान की मूर्तियां विराजमान कर दी गईं। पुजारी बृजेश महाराज ने गंगाजल स्नान करवाकर चंदन, इत्र लगाकर व नई पोशाक धारण करवा आरती की। आरती में रोजाना से कई गुना भीड़ अधिक थी। देर रात तक भजन कीर्तन चलता रहा। सभी के चेहरे पर खुशी का भाव था कि अब हमारी राधारानी व बिहारी जी कभी हमें छोड़कर नहीं जाएंगे, क्योंकि कोर्ट ने भी पुजारी को आदेश दिए हैं कि प्रतिमाएं मंदिर मेें विराजमान करवाईं जाएं। मंदिर में बृहस्पतिवार को भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
भक्तों की आंखों में छलक उठे आंसू
भक्तों की आंखों में छलक रहे थे आंसू, आज खुशी के आंसू थे अपने आराध्य से मिलन के। 14 जनवरी 2009 की वह मनहूस काली रात जब यहां के लोगों को याद आती है वे विचलित हो जाते हैं। 65 वर्षीय बृजकिशोर वर्मा बताते हैं कि इस क्षेत्र के लोगों का राधा रानी बिहारी जी से पांच सौ वर्ष पुराना नाता है। 2009 में जब हमारे आराध्य हमसे बिछड़ गए थे तो लोग दहाड़े मारकर रो रहे थे, सड़क से लेकर थाने तक खूब हंगामा हुआ था, पर हमारे प्रभु से भक्तों का दुख नहीं देखा गया था, 21 जनवरी 2009 को चोर पकड़े गए तथा 25 जनवरी को कोर्ट द्वारा पुजारी जी को मूर्तियां सुपुर्दगी में मिलने के बाद भगवान जी को मंदिर में फिर से विराजमान करवा दिया था, पर मुकदमा कोर्ट में होने के कारण तरह तरह की आशंकाएं थी जो 08 जनवरी 2020 को कोर्ट के आदेश के बाद दूर हो गईं। अब भक्त खुश हैं कि उनके बिहारी जी और राधारानी उन्हें छोड़कर कभी नहीं जाएंगे।
मेरी विनती यही राधा रानी
भगवान के अदालत से लौटने के बाद मंदिर में देर रात तक भक्ति संगीत चलता रहा। रात के सन्नाटे में हरमोनियम, ढोलक तबले पर भक्त भजनों में डूबे हुए थे, स्वर लहरियों में एक ही विनती की जा रही थी, मेरी विनती यही राधा रानी कृपा बरसाए रखना। पुजारी जी बृज किशोर कहते हैं सभी की प्रभु से यही विनती है कि जिस तरह बिछोह के बाद फिर से मिलन हुआ यह स्थायी रूप से रहे।
मंदिर का इतिहास
सोलहवीं सदी में ओरछा नरेश महाराजा मधुकरशाह के समय ओरछा रियासत की जागीर पृथ्वीपुर की गढ़ी में मंदिर निर्माण कर राधारानी व बिहारी जी को इसमें विराजमान कराया गया था। समय बीता और गढ़ी जर्जर होकर ध्वस्त हो गई तो भक्तों ने करीब सौ साल पहले किले के ठीक सामने एक मंदिर बनाकर मूर्तियां इसमें स्थापित कर दीं। इसी मंदिर से चोर 2009 में प्रतिमाओं को चोरी करके ले गए थे, पर सात दिन के अंदर पकड़ भी गए थे। यही मामला अदालत में विचाराधीन है।
पांच पीढ़ी से कर रहे हैं कान्हा की सेवा
हम पांच पीढ़ियों से राधा बिहारी सरकार की सेवा कर रहे हैं। जब मूर्तियां चोरी चलीं गईं तो हमने खाली सिंहासन पर विनती क रते हुए कहा था कि प्रभु मैं आपका अपने परिवार में पांचवीं पीढ़ी का पुजारी हूं, ऐसी कौन सी गलती हुई कि आप हमें छोड़कर चले गए. प्रभु ने विनती सुनी और आज फिर सिंहासन पर विराजमान हैं तथा हमें सेवा का अवसर दिया।
बृजेश महाराज
बिहारी जी मंदिर के पुजारी जी
हम सबके दुलारे हैं कान्हा
भक्त और भगवान के बीच भाव के भीनी सी चादर होती है, यही आस्था का स्वरूप है। बिहारी जी हमारे पूरे पृथ्वीपुर क्षेत्र के दुलारे हैं, इसलिए जब वे निवाड़ी अदालत गए तो क्षेत्र के लोग उन्हें गाजेबाजे के साथ लेकर गए। हम सब पांच पीढ़ियों से इस मंदिर में आते रहे हैं।
बृजकिशोर वर्मा
स्थानीय निवासी
यह सब कान्हा की नटखट लीला है
बिहारी जी पहले हमें छोड़कर चले गए, इसके बाद फिर आ गए । थाना कचहरी जेल तो हमारे कान्हा बचपन में घूम चुके थे, उनका जन्म ही जेल में हुआ था, एक फिर उन्होंने अदालत जाने की लीला कर दी, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है।
पवन
स्थानीय निवासी
बच्चे बच्चे के सिरमौर हैं बिहारी जी
हमारे दादा दादी मंदिर पर आते थे, उनके साथ हम आने लगे तथा अब हमारे बच्चे पूजा अर्चना करने आते हैं हमारे नगर के बच्चे बच्चे के सिरमौर है बिहारी जी
धर्मेंद्र पुजारी
पृथ्वीपुर