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पशुपालकों के केसीसी कार्ड बनाने को बैंक राजी नहीं

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पशुपालकों के केसीसी बनाने को बैंक राजी नहीं
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झांसी। सरकार ने किसानों तर्ज पर पशुपालकों के केसीसी कार्ड बनाने की बात कही लेकिन, इस योजना को बैंकों का साथ नहीं मिल रहा। इस वजह से अब तक सिर्फ पांच फीसदी पशुपालकों के ही किसी तरह केसीसी बन सके हैं। उसके बाद बैंकों ने पल्ला झाड़ लिया। अब बाकी पशुपालक बैंकों का चक्कर काटने को मजबूर हैं।
किसानों की तरह पशुपालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) दिए जाने की योजना बनाई गई। डेयरी, मुर्गी पालन एवं मत्स्य पालन करने वालों को कारोबार बढ़ाने के लिए बैंक से मदद दी जानी थी। पशुपालकों को चार फीसद ब्याज पर दो लाख का ऋण मिल सकता है। मत्स्य पालकों को ईंधन, बर्फ, श्रम शुल्क, मौरिंग, लैडिंग शुल्क, पट्टा किराया आदि के लिए मोटी रकम की जरूरत होती है, जिसकी जरूरत इससे पूरी हो सकती है। सरकार की मंशा थी कि केसीसी के जरिए छोटे पशुपालकों को साहूकारों के पास जाने से रोका जा सके। सभी बैंकों को तेजी से इसे बनाने के निर्देश दिए गए लेकिन, राष्ट्रीयकृत बैंक ही इसे बनाने से हिचक रहे हैं। जानकारों के मुताबिक सभी अहम बैंकों ने अलग-अलग बीस से अधिक पशुपालक केसीसी नहीं बनाए जबकि झांसी में करीब डेढ़ लाख पशुपालक बताए जा रहे। सरकार इनको भी संस्थागत ऋण प्रणाली के तहत लाना चाहती है लेकिन, बैंक ही इस काम में रोड़ा बने हैं।
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सिर्फ चार फीसदी ब्याज पर कर्ज
सामान्य तौर पर खेती-किसानी के ऋण में नौ फीसदी ब्याज लिया जाता है। केसीसी के कर्ज पर सरकार दो फीसदी सब्सिडी देती है। समय पर ऋण लौटा देने वाले किसानों को तीन फीसदी अतिरिक्त छूट मिलती है। इस तरह चार फीसदी दर पर किसानों को करीब तीन लाख रुपये का लोन मिलता है। केसीसी कार्ड बनवाने पर कोई प्रोसिंगम चार्ज भी नहीं लिया जाना है।
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