सिविल लाइन स्थित एक बंगले की 13 साल पहले फर्जी तरीके से वसीयत कर दी गई थी। इस मामले में विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट ) जितेंद्र यादव की अदालत ने एक गवाह की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
सिविल लाइन स्थित एक बंगले की 13 साल पहले फर्जी तरीके से वसीयत कर दी गई थी। इस मामले में विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट ) जितेंद्र यादव की अदालत ने एक गवाह की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक मुंबई के अंधेरी ईस्ट निवासी नेवल रानी डिक ने पिछले साल नवाबाद थाने में तहरीर दी थी। बताया था कि उनके मौसा फिरोज एडल्जी वायस जन्म से सिविल लाइन स्थित अपने बंगले में रह रहे थे। उन्हें 21 साल से लकवा की शिकायत थी और इसके चलते उनकी मौत हो गई। 2013 में उनके बंगले की फर्जी वसीयत राजेंद्र सिंह यादव के नाम से कर दी गई। उन्होंने मुख्य षड्यंत्रकारी खालिद हुसैन को बताया। राघवेंद्र सिंह व अन्य लोगों ने गवाही दी थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
बुधवार को विशेष न्यायालय में गवाह राघवेंद्र की जमानत अर्जी लगाई गई। एडीजीसी राजेंद्र रावत ने तर्क दिया कि वसीयतनामा कूटरचित दस्तावेज के आधार पर तैयार किया गया है। विशेष न्यायालय ने अभियुक्त राघवेंद्र सिंह की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।