होलिका के साथ जलाए बुरे विचार
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रविवार की रात महानगर में जगह-जगह होलिका दहन हुआ। होलिका की आग में तेजी पकड़ने के साथ ही लोगों ने खूब अबीर-गुलाल उड़ाया। एक दूसरे को रंग लगाकर होली की बधाई दी। इसके साथ ही होली का धमाल डीजे की तेज धुनों पर शुरू हो गया। युवा टोलियों की मौजमस्ती का दौर देर रात तक चलता रहा।
सुबह से ही घर-घर में होली की तैयारियां शुरू हो गई थीं। महिलाएं परंपरागत पकवान गुजिया-पपड़ी बनाने में मशगूल हुई, तो युवा व बच्चों के जत्थे गली -मुहल्लों में होलिका दहन की तैयारियों में जुट गए। दोपहर बाद गली-मुहल्लों में सजी होलिका को महिलाओं ने पूजना प्रारंभ कर दिया। महिलाओं ने प्रसाद अर्पण के साथ ही गोबर के बरबूले होलिका में चढ़ाए और पूजन अर्चन किया। देर शाम होते ही शुभ मुहूर्त में पंचकुइयां शीतला माता मंदिर, घास मंडी में होलिका का दहन हुआ। इसके बाद ही लोगों ने यहां से अग्नि लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में होलिका जलाई। सुख समृद्धि की कामना के साथ लोगों ने नए गेंहू की बालियां सेंकीं और घर ले जाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। महानगर में 850 से भी अधिक स्थानों पर होलिका दहन हुआ। सदर, शहर, सीपरी व नगरा के सभी गली मुहल्लों में होलिका दहन हुई।
यात्रियों का टोटा झेला रोडवेज ने होली पर
होली के दिन रविवार पर रोडवेज को कम ही यात्री मिले। 135 बसें चलीं, लेकिन उम्मीद के मुताबिक यात्री संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं हुई। एआरएम राम लवट ने बताया कि यात्री संख्या में जल्द तेजी आएगी। उनके अनुसार 20 लाख रुपये कलेक्शन होना चाहिए था, लेकिन दिन भर में मात्र साढे़ तेरह लाख रुपये ही इकट्ठा हुए।