समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद डा. चंद्रपाल सिंह यादव ने बताया कि विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस में गठबंधन ‘सिटिंग और रनिंग’ के फार्मूले पर होगा। यानी कि वर्तमान में विधानसभा की जो सीट जिस पार्टी के पास है, वो उसके खाते में जाएगी। जिन सीटों पर दोनों पार्टियों में से किसी का भी प्रतिनिधित्व नहीं है, वो सीट पिछले विधानसभा चुनाव में रनिंग पोजीशन में रहने वाली पार्टी के खाते में जाएगी।
सांसद ने कहा कि वैसे तो प्रदेश में कांग्रेस के पास ज्यादा वोट नहीं है, लेकिन विधानसभा चुनाव में जीत- हार का अंतर बहुत कम होता है, ऐसे में दोनों पार्टियों के साथ आ जाने से दोनों को ही लाभ होगा। इससे जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। सांप्रदायिक शक्तियों को पछाड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन का सीधा गणित है, जहां जिस पार्टी का अभी विधायक है, वो सीट उसके खाते में जाएगी। जिन सीटों पर सपा, कांग्रेस दोनों ही पार्टियों का प्रतिनिधित्व नहीं है, वहां यह देखा जाएगा कि 2012 के चुनाव में किस पार्टी को ज्यादा वोट हासिल हुए थे, वो सीट उसी को मिलेगी।
सांसद ने कहा कि गठबंधन के फार्मूले पर अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान को ही लेना है। इस पर शीघ्र ही फैसला होगा। सपा और कांग्रेस का एक साथ विधानसभा चुनाव में उतरने प्रदेश के हित में रहेगा। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच अंदरखाने में गठबंधन की तैयारियां जारी हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुलकर कांग्रेस से गठबंधन की इच्छा जता चुके हैं।
फिर तो कांग्रेस की दावेदारी खत्म
सपा के सिटिंग और रनिंग के फार्मूले के हिसाब से कांग्रेस के खाते में जिले की एक भी विधानसभा क्षेत्र की सीट नहीं आएगी। 2012 के विधानसभा चुनाव में गरौठा और मऊरानीपुर में सपा प्रत्याशी जीते थे। इन दोनों में दूसरे नंबर पर बसपा रही थी। फार्मूले के हिसाब से यह दोनों सीट सपा के खाते में ही जाएंगी। जबकि, बबीना सीट पर सपा दूसरे पर और कांग्रेस चौथे स्थान पर थी। झांसी सदर सीट पर सपा प्रत्याशी तीसरे और कांग्रेस ने चौथे स्थान पर रही थी। इस हिसाब से इन दोनों सीटों पर भी सपा का पहला दावा होगा।
कांग्रेस अकेले दम पर लड़ेगी चुनाव
कांग्रेस नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा का चुनाव अकेले दम पर लड़ने जा रही है। सपा या अन्य किसी भी दल से पार्टी की गठबंधन की कोई इच्छा नहीं है। यदि ऐसा होता तो पार्टी प्रदेश की विधानसभा की सभी 403 सीटों पर प्रत्याशियों का पैनल ही क्यों तैयार करती? गठबंधन का प्रस्ताव सपा की ओर से आया है। इस पर कांग्रेस हाईकमान ने अब तक कोई फैसला नहीं किया है।