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पीएचसी में प्रसव से इंकार के बाद सड़क पर बच्चे को दिया जन्म

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Baby birth on road in jhansi - फोटो : DEHAT
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टहरौली (झांसी) टहरौली में शुक्रवार को बरुआसागर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला डॉक्टर के प्रसव कराने से इंकार करने पर सड़क पर ही प्रसूता ने बच्चे को जन्म दिया। टेंपो से उसका ससुर और गांव की आशा प्रसव पीड़ा होने पर महिला को अस्पताल पहुंचा। वहां पर आ महिला डॉक्टर ने प्रसव कराने से इंकार कर दिया तो दोनों महिला को लेकर टेंपो से टहरौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ला रहे थे। लेकिन रास्ते में प्रसव पीड़ा अधिक होने पर सड़क किनारे पड़ी एक झोपड़ी के पास आशा ने टेंपो रुकवा दी। इसके बाद वह महिला को लेकर झोपड़ी में गई। वहां पर उसका प्रसव कराया। वहां पर उसने एक बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद टहरौली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा.महेश चंद्रा को इसकी सूचना दी गई। उन्होंने तुरंत ही एंबुलेंस वहां पर भेजी। इसके बाद दोनों जच्चा और बच्चा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। वहां पर दोनों का इलाज किया गया। शाम को तीन बजे के करीब दोनों को छुट्टी दे दी गई।
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टहरौली थाना क्षेत्र के गांव सारोल निवासी मनोज कुशवाहा की पत्नी वर्षा (22) को शुक्रवार को सुबह प्रसव पीड़ा हुई। इस पर गांव की आशा को जानकारी दी गई। आशा और महिला का ससुर रामपाल टेंपो से सुबह साढ़े सात बजे के करीब गर्भवती महिला को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरुआसागर पहुंचे। वहां पर तैनात महिला डॉक्टर ने प्रसव कराने से इंकार कर दिया। हालांकि आशा और उसके ससुर ने काफी उसकी मिन्नतें कीं लेकिन फिर भी डॉक्टर प्रसव कराने के लिए राजी नहीं हुई। इसके बाद आशा और उसका ससुर महिला को टेंपो से टहरौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहे थे। रास्ते में ही महिला दर्द से कराहने लगी तो आशा ने सड़क के किनारे पड़ी एक झोपड़ी के पास ही टेंपो को रुकवा दिया। खाली झोपड़ी में अंदर ले जाकर महिला का किसी तरह प्रसव कराया। महिला ने बच्चे के जन्म दिया। वहां पर आसपास के लोग भी आ गए। किसी ग्रामीण ने टहरौली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. महेश चंद्रा को इसकी सूचना दी। उन्होंने तुरंत ही मेडिकल स्टॉफ के साथ एंबुलेंस मौके पर भेजी। एंबुलेंस के वहां पर पहुंचने पर जच्चा और बच्चा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। वहां पर डॉक्टरों ने जच्चा और बच्चा के स्वास्थ्य की जांच की। डॉक्टर महेश चंद्रा ने बताया कि दोनों के पूरी तरह स्वस्थ रहने पर तीन बजे शाम को दोनों को छुट्टी दे दी गई। महिला के ससुर ने बताया कि अगर साथ में आशा न होती तो दोनों को बचाना भी मुश्किल हो जाता। उन्होंने कहा कि बरुआसागर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर महिला डॉक्टर से काफी मिन्नतें की लेकिन वह किसी तरह प्रसव के लिए राजी नहीं हुई।
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