अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। गर्मी में पसीना बहने से शिशुओं में परेशानी बढ़ रही है। रोने के चलते वे डिहाइड्रेशन फीवर के शिकार हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में बुधवार को ऐसे करीब 35 बच्चे आएं।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि उमसभरी गर्मी में तेजी से पसीना शरीर से बाहर निकलता है, जिससे शिशु का शरीर डिहाइड्रेट (पानी की कमी) हो जाता है। प्यास लगने पर शिशु रोने लगता है जब पानी नहीं मिलता है, तो वह और तेजी से रोता है। रोने से शिशु के शरीर का तापमान बढ़ने से डिहाइड्रेशन फीवर हो जाता है। इतने पर भी पानी नहीं मिलता है तो सिर में दर्द और फिर बच्चा सुस्त होने लगता है। हालत खराब होने लगती है और भर्ती करने की स्थिति बन जाती है।
उन्होंने बताया कि यदि बच्चा सामान्य तौर पर रो रहा है तो छह माह तक के शिशुओं को माताएं स्तनपान कराएं, जिससे उसकी भूख और शरीर में पानी की पूर्ति हो सके। यदि छह माह से ज्यादा का शिशु है तो उसे पानी पिलाएं। यदि बच्चा रुक-रुककर रो रहा है तो उसे ओआरएस का घोल देना शुरू कर दें ताकि किसी भी तरह की दिक्कत बढ़े नहीं। यह भी ध्यान रखना होगा कि शिशु को ठंडे अथवा हवादार स्थान पर रखें और समय-समय पर पानी पिलाते रहें।
उमसभरी गर्मी में शिशुओं को समय-समय पर पानी अवश्य पिलाएं ताकि पसीना बहने से शरीर में पानी की कमी नहीं हो। शिशु के बार-बार रोने से शरीर का तापमान बढ़ता है, जिससे डिहाइड्रेशन फीवर, सिर दर्द होता है। ओपीडी में ऐसे शिशुओं को लेकर परिजन उपचार के लिए आ रहे हैं, जिन्हें उसकी केयर के बारे में बताते हुए उपचार दिया जा रहा है।
- डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष
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इन चीजों पर ध्यान रखना जरूरी
यदि शिशु ने दो घंटे से ज्यादा समय तक पेशाब नहीं किया है तो पानी पिलाएं
रोने से बच्चे को डिहाइड्रेशन फीवर हो रहा है तो उसे ओआरएस घोल पिलाएं
तेज रोने के बाद बच्चा सुस्त हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर्स को दिखाएं
साफ-सफाई का ध्यान रखें। पसीने से शिशु को फंगल, वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है।