ओरछा (झांसी)। बुंदेलखंड की तीर्थ नगरी ओरछा और अवध की रामनगरी अयोध्या का आज से नहीं सैकड़ों साल पुराना नाता है। ओरछा धाम के रामराजा मंदिर में लगे हुए महारानी कुंअर गणेश के चित्रों के नीचे लिखी हुई टैग लाइन, रामराजा सरकार के दो निवास हैं खास, दिवस ओरछा रहत हैं, रैन अयोध्या वास। ऐसी धार्मिक कथा है कि सोलहवीं सदी में अयोध्या के रामलला बुंदेला महारानी कुंअर गणेश की गोदी में बैठकर पुत्रवत अयोध्या से ओरछा आए थे। इसके बाद महारानी ने अपने निज निवास में ही उनका सिंहासन स्थापित कर उन्हें राजा के रूप में राज तिलक किया था। इसके बाद से ही ऐसी धार्मिक मान्यता है कि दिन के समय रामराजा सरकार ओरछा में रहकर राजा के रूप में अपना दरबार लगाते हैं तथा रात में यहां से अयोध्या जाकर विश्राम करते हैं।
पाताली हनुमान जी प्रतिदिन रात्रि में रामराजा को लेकर जाते हैं अयोध्या
रामराजा सरकार के प्रधान पुजारी रमाकांत शरण महाराज बताते हैं कि सैकड़ों साल से यह परंपरा चली आ रही है कि रामराजा सरकार की ब्यारी की रात्रिकालीन आरती के बाद ब्यारी का प्रसाद व आरती की ज्योति पाताली हनुमान मंदिर पर ले जाई जाती है। हनुमानजी की ब्यारी के बाद वह रामराजा सरकार को लेकर अयोध्या के लिए प्रस्थान करते हैं। यह परंपरा महारानी कुंअर गणेश के समय से ही चली आ रही है और आज भी जारी है।
महारानी कुंअर गणेश ने दिया था अवध के संतों को वचन
रामराजा मंदिर के सहायक पुजारी विजय शरण महाराज बताते हैं कि इस परंपरा के बारे में ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जब महारानी कुंअर गणेश रामजी को अयोध्या से ओरछा लेकर आ रहीं थीं तो अवध के संतों ने उन्हें रोककर कहा था कि वह रामलला को ओरछा नहीं ले जाने देंगे, तब महारानी कुंअर गणेश ने उन्हें बचन दिया था कि रामजी अवध और बुंदेलखंड दोनों स्थानों पर रहेंगे। इसके बाद से ही यह दोहा प्रचलित है कि, रामराजा सरकार के दो निवास हैं खास, दिवस ओरछा रहत हैं रैन अयोध्या वास।