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डेढ़ सौ और स्थानों पर जेटीबीएस खोलने के लिए मांगे आवेदन

Sun, 05 Jul 2015 12:54 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
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झांसी। रेल मंडल प्रशासन उनतीस और स्टेशनों के डेढ़ सौ स्थानों के लिए जन साधारण टिकट बुकिंग सेवक (जेटीबीएस) की नियुक्ति करने जा रहा है। इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं। अभी रेल मंडल के अलग- अलग 56 स्थानों पर जेटीबीएस काउंटर खुले हुए हैं।
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उत्तर मध्य रेलवे के झांसी रेल मंडल के विभिन्न नगरों में यात्रियों की सुविधा के लिए जन साधारण टिकट बुकिंग सेवा के अंतर्गत एक बार फिर आवेदन मांगे गए हैं। इस बार 29 स्टेशनों के 150 स्थानों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इनमें झांसी में 14, ग्वालियर में 18, बांदा में 12, मुरैना, चित्रकूट धाम कर्वी, महोबा, ललितपुर व उरई में नौ- नौ, अतर्रा व बबीना में सात- सात, दतिया व डबरा में छह- छह, खजुराहो व मानिकपुर में पांच- पांच, एट, भिंड, बिरलानगर, भरूआसुमेरपुर, बेलाताल, डभौरा, घाटमपुर, हमीरपुर, कुलपहाड़ व कालपी में दो- दो तथा मऊरानीपुर, पुखरायां, रागौल, शंकरगढ़ व तालबेहट में एक- एक स्थान के लिए आवेदन मांगा गया है। आवेदन फार्म मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में सभी कार्य दिवसों में सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक प्राप्त किए जा सकते हैं। 28 जुलाई को अपराह्न दो बजे तक आवेदन जमा होंगे।

 यह है योजना
रेलवे ने वर्ष 2009 में यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन से दूर शहर व कस्बों में अनारक्षित टिकट उपलब्ध कराने के लिए जन साधारण टिकट बुकिंग सेवा शुरू की थी। इस सेवा के लिए रेलवे से लाइसेंस लेने के बाद संबंधित ठेकेदार अपना ढांचा तैयार कर काम करता है। ठेकेदार को काउंटर खोलने की जगह, उपकरण, बिजली, इंटरनेट का कनेक्शन, कर्मचारी आदि सुविधाएं स्वयं जुटाने होते हैं। रेलवे प्रत्येक यात्री पर एक रुपये कमीशन देता है।
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अब तक 56 स्थानों पर ही खुल सके  जेटीबीएस
ग्वालियर, ललितपुर, बांदा, महोबा, हरपालपुर, चित्रकूट, मानिकपुर, उरई, डबरा, झांसी में अब तक कुल 56 स्थानों पर जनसाधारण टिकट बुकिंग सेवक नियुक्त किए जा सके हैं। इसमें झांसी में मात्र पांच ही स्थानों पर जेटीबीएस खुल सके।

टिकट वापसी में आती है परेशानी
रेलवे के जन साधारण टिकट बुकिंग सेवक केंद्रों पर यात्रियों के लिए टिकट लेना तो सुविधाजनक है, लेकिन इन काउंटरों पर टिकट वापसी की व्यवस्था नहीं है। मजबूरन ऐसी स्थिति में यात्री को स्टेशन के बुकिंग काउंटरों पर टिकट निरस्त कराने के लिए कतार में लगना पड़ता है। अक्सर कर्मचारी ऐसे यात्रियों को टिकट वापसी से मना कर देता है। इस कारण आए दिन नोकझोंक की स्थिति बनी रहती है।
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