अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत ‘द ओपन माइक शो’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें नवोदित कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिनके माध्यम से समाज की विभिन्न बुराइयों को उठाया गया। रचनाकारों ने बेटी को ब्रह्मांड की सबसे श्रेष्ठ कृति बताया। इस दौरान नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की शपथ भी ली गई।
राजकीय संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में आशुतोष विश्वकर्मा ने अपनी रचना ‘इज्जत करो हर बेटी की, क्या अपनी क्या पराई है...’ सुनाई। श्वेता तिवारी ने कहा ‘हम अर्श का सहारा लें, हमारी ऐसी जात नहीं, क्या कहा? हमारा घर गिरने वाला है, जाओ आंधियों से कह दो अभी उनकी इतनी औकात नहीं’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। उर्जवस्ति सिंह ने कहा कि ‘... मस्तिष्क की उपज, बचपन की सेहचरी है कविता, मेरी दास्तां का व्याख्यान करती, अंतर्मन में मेरे है कविता’ प्रस्तुत की।
आरिफ खान ने कहा कि ‘एक मां जब अपने बच्चे को नौ महीने पेट में रखती है, तो वह दुनिया का सबसे बड़ा दुख दर्द सहती है।’ सक्षम खरे ने मध्यम वर्ग की दुविधाओं को हास्य अंदाज में प्रस्तुत किया। स्वाति और एकता श्रीवास्तव ने गीत प्रस्तुत किए। इस मौके पर अमन, इशित, अर्जुन, आकाश, अभिषेक, प्रत्यक्ष, अखिलेश, आमिर, अल्ताफ, जानवी, कनिष्का, श्वेता आयुषी आदि उपस्थित रहीं।