शहर में अधिकतर ऑटो चालकों की मनमानी सिर चढ़कर बोल रही है। वे बेलगाम हैं। न तो नियमों का पालन कर रहे हैं और न ही कानून का। जहां मन किया रोक दिया, जहां मन किया मोड़ दिया और जहां मन किया ट्रैफिक जाम कर सवारियां भरने लगे।
शहर में आठ हजार से अधिक ऑटो दौड़ रहे हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मिनर्वा चौराहा, सीपरी बाजार में लोग इनसे परेशान हैं। मिनर्वा चौराहे पर बीच रोड पर खडे़ होकर सवारियां भरने से जाम लगता रहता है। सवारी देखते ही कई ऑटो खड़े हो जाते हैं और सवारियों को पकड़कर बैठाने लगते हैं। इस कारण यात्रियों से झड़पें भी होती है। दिन ढलते ही किराया दोगुना कर देते हैं। किराया निर्धारित है, लेकिन न ही ऑटो पर किराए का बोर्ड दिखता है और न ही इसका पालन होता है।
नियमानुसार ऑटो में तीन से अधिक सवारियां नहीं बैठा सकते, लेकिन 10 सवारियां तक भर लेते हैं। लोगों की मजबूरी यह है कि उनके सामने कोई विकल्प नहीं है। संबंधित विभाग इस ओर मुंह मोडे़ हैं। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
ये हैं नियम
- ऑटो में तीन सवारी से ज्यादा नहीं बैठा सकते
- समय-समय पर ऑटो की फिटनेस चेक करवाना
- ड्राइवर को वर्दी पहनना और नेमप्लेट जरूरी
- निर्धारित गति सीमा में ऑटो चलाना होगा
- निर्धारित किया गया किराया ही ले सकते हैं
उल्लंघन
- तेज आवाज में गाने बजाना
- निर्धारित संख्या से अधिक सवारियां बैठाना
- मनमाना किराया बसूलना
- मनमानी जगह ऑटो रोकना
- निर्धारित गति सीमा से तेज ऑटो दौड़ाना
- ऑटो की फिटनेस पर ध्यान न देना
हम कैसे विरोध करें। पंगा नहीं ले सकते। यह काम तो आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस को करना चाहिए। लगातार अभियान चलाना चाहिए। तभी कुछ सुधार होगा।
महेंद्र कुमार सेन, लक्ष्मी गेट बाहर
एक दिन मुझे जल्दी मेडिकल कॉलेज जाना था। इलाइट चौराहे से मेडिकल तक जाने में आधा घंटा लग गया। जहां मन हो खड़े हो जा रहे थे। इस कारण मेरी लड़ाई भी हो गई।
मनोज, सुभाष गंज
ऑटो में बैठने से पहले ही दस रुपये किराया बता देते हैं। कुछ कहो तो अभद्रता करते हैं। समस्या तो है ही। अफसर कार्रवाई करें तो इन पर लगाम लगे। मनमानी चरम पर है।
दीपक, बड़ाबाजार
दिन ढलते ही किराया दोगुना कर देते हैं। सवारियां विरोध भी नहीं कर सकती। ओवर लोडिंग के कारण कई बार दुर्घटनाएं घट चुकी हैं, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
रमेश साहू, मिशन कंपाउंड