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किसी भी वायरस को मारने के लिए भाप लें

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झांसी। कोरोना समेत चाहे कोई भी वायरस हो, उसको मारने में भाप लेना सबसे अधिक कारगर प्रक्रिया है। यह दावा है महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के सेवानिवृत्त ईएनटी चिकित्सक डॉ. जगदीश पुरोहित का। उन्होंने कहा कि भाप गले में खराश, खांसी, जुकाम और बुखार को कम करता है।
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डॉ. पुरोहित के अनुसार वायरस आइस एज में सबसे पहले पृथ्वी पर आया था, जब यहां पर सिर्फ पानी और बर्फ थी। इनको गर्मी से सबसे ज्यादा परेशानी होती है। यदि आप कोई भी ठंडा पदार्थ नहीं खाते हैं तो यह शरीर में प्रवेश नहीं कर सकता और अगर अंदर चला गया है तो भाप लीजिये। जो वायरस अंदर गया है और सेल्स के अंदर नहीं पहुंचा तो वो भाप से तुरंत मर जाएगा। जो सेल्स के अंदर चला गया, वह नहीं मरेगा और वह अंदर जाने के बाद अपनी संख्या बढ़ाता है। पांच दिन में वह सेल्स स्वयं मर जाती हैं तथा बलगम के साथ बाहर आती है। भाप बलगम को निकालने में भी सहायता करती है। अमूमन सुबह-शाम भाप ले सकते हैं और यदि आप संक्रमित हैं, तो हर तीन घंटे में भाप ले सकते हैं।
भाप कैसे मारती है वायरस
पानी से भाप बनने में 259 किलो जूल्स एनर्जी लगती है और जब यही भाप पानी बनती है तो 259 किलो जूल्स एनर्जी छोड़ती है। नाक के जरिये भाप अंदर जाकर पानी बनकर बाहर निकल आती है, जिससे वायरस मर जाता है।
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सांस संबंधी बीमारी से बचाती है भाप
यदि कोई व्यक्ति वायरस से संक्रमित है तो उसके अंदर बलगम बनने लगता है। इस बलगम को बाहर निकालने में भाप बहुत सहायक होती है। भाप लेते रहने से सांस संबंधी बीमारी व निमोनिया जैसी बीमारी नहीं होती है।
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