छुट्टा जानवरों से सड़कों पर हालात खतरनाक
झांसी। अधिवक्ता याकूब अहमद मंसूरी बुधवार की शाम अंबावाय से अपने घर की ओर लौट रहे थे। इसी दरम्यान बीच सड़क पर दो सांडों को लड़ते देख उन्होंने तत्काल अपनी बाइक रोक ली। लेकिन, सांड लड़ते हुए उन्हीं की ओर आ गए। इससे पहले कि अधिवक्ता संभल पाते, वे सांडों की चपेट में आ गए। इससे उनके एक हाथ की दो हड्डियां टूट गईं और शरीर में अन्य जगह भी चोटें आईं। ऑपरेशन के बाद वे अस्पताल में भर्ती हैं। ये केवल एक व्यक्ति की बात नहीं है, बल्कि आए दिन लोग छुट्टा जानवरों की चपेट में आकर घायल हो रहे हैं। प्रमुख सड़कें हों या संकरी गलियां, सभी जगह छुट्टा जानवरों का खतरनाक ढंग से जमावड़ा रहता है। नियंत्रण के सरकारी उपाय शहर में अभी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
नगर निगम की परिधि में गोवंश के लिए तीन आश्रय स्थल संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायतों में 198 पशु आश्रय स्थल हैं। सभी जगह अपनी क्षमता के अनुसार गोवंश मौजूद है। बावजूद, शहर को इनसे छुटकारा नहीं मिल पाया है। जगह-जगह इनके झुंड नजर आते हैं। बीच सड़क पर आपस में भिड़ जाते हैं, जिससे स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। कुछ महीने पहले सदर बाजार में सांड की चपेट में आने से रेल कर्मचारी नीरज गर्ग की मौत हो गई थी। इसके अलावा शिवपुरी रोड पर रक्सा के पास कार के सामने अचानक छुट्टा जानवर आने से पिता-पुत्र की मौत हो गई थी। छुट्टा जानवर आए दिन लोगों को अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं। साथ ही इनके जमावड़े से सड़क का यातायात भी प्रभावित बना रहता है। जन सामान्य के लिए ये बड़ा खतरा बने हुए हैं। हाइवे पर भी इनके झुंड के झुंड नजर आते हैं। यातायात बाधित बना रहता है, लोग जैसे-तैसे किसी तरह बचते बचाते गाड़ी निकालते हैं। जाम की स्थिति से भी दो-चार होना पड़ता है।
दुधारू पशु भी बने हुए हैं मुसीबत
छुट्टा जानवर ही नहीं, बल्कि दुधारू पशु भी लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। तमाम पशु पालक दूध निकालने के बाद गो वंश को छुट्टा छोड़ देते हैं। उन्हें अपने जानवर की याद तब ही आती है, जब दुबारा दूध निकालने का समय आ जाता है। हालांकि, नगर निगम द्वारा ऐसे जानवरों को पकड़ा जा रहा है और जुर्माना वसूलने के बाद छोड़ा जा रहा है। बावजूद, लोगों की प्रवृत्ति में सुधार नहीं आ रहा है।
सौ एकड़ में बनेगा गोवंश विहार
बुंदेलखंड को अन्ना पशुओं से निजात दिलाने के लिए बुंदेलखंड के झांसी समेत सभी सातों जिलों में गोवंश विहार बनाने पर शासन ने सहमति जताई है। झांसी में बनने वाले गोवंश विहार के लिए एक करोड़ बीस लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसका निर्माण नगर निगम द्वारा बिजौली में सौ एकड़ भूमि पर किया जा रहा है। इसमें एक हजार पशुओं को रखने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा ग्राम पंचायतों में भी गोवंश विहार बनाने की योजना है।
बुंदेलखंड में अन्ना पशुओं से निपटने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। 106 आश्रय स्थल बनने के बाद से गोवंश को पकड़कर आश्रय स्थल लाने का काम किया जा रहा है। जल्द ही छुट्टा जानवरों से छुटकारा मिलेगा। - डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
आश्रय स्थलों में क्षमता के अनुसार गोवंश है। नये गोवंश विहार के लिए जमीन चिह्नित की जा चुकी है। इसके अलावा कैटल कैचिंग टीम लगातार गोवंश को पकड़कर आश्रय स्थल तक ले जाने का काम कर ही है। गोवंश को छुट्टा छोड़ने पर पशु पालकों से भी जुर्माना वसूला जा रहा है। - डॉ. वीके निरंजन, पशु चिकित्साधिकारी - नगर निगम