अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। भारी गहमागहमी के बीच शुक्रवार को प्रियंका साहू नगर निगम कार्यकारिणी की निर्विरोध उपसभापति बन गईं। भाजपा में उम्मीदवार को लेकर घमासान छिड़ा रहा। नामांकन दाखिल करने का समय खत्म होने से चंद मिनट पहले प्रियंका के नाम पर मुहर लगी। नामांकन खत्म होने से महज दो मिनट पहले उन्होंने पर्चा दाखिल किया। विपक्ष ने भी उम्मीदवार उतारा लेकिन, हार से बचने के लिए उन्होंने उम्मीदवारी वापस ले ली।
शुक्रवार को तय समय पर उपसभापति चुनाव की प्रक्रिया आरंभ हुई। दोपहर एक बजे नामांकन आरंभ होते ही विपक्षी खेमे से आशीष रायकवार ने चुनौती पेश की लेकिन, सबकी निगाहें भाजपा उम्मीदवार पर थीं। दोपहर 1:20 मिनट तक भाजपा उम्मीदवार तय नहीं था। नामांकन भरने में महज दस मिनट का समय शेष था लेकिन, भाजपा उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया। छह मिनट बाद दोपहर 1:26 मिनट पर दिनेश सिंह उर्फ बंटी राजा की अगुवाई में प्रियंका साहू, सुनील नैनवानी, प्रदीप खटीक समेत अन्य पार्षद सदन के हॉल में पहुंचे।
प्रियंका जब नामांकन भरने आगे बढ़ीं तब जाकर उनकी उम्मीदवारी का पता चला। समय खत्म होने से महज दो मिनट पहले प्रियंका ने नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन दाखिल करने के बाद आशीष ने अपना पर्चा वापस ले लिया। ऐसे में प्रियंका निर्विरोध उपसभापति निर्वाचित घोषित कर दी गईं। महापौर बिहारी लाल आर्य, एमएलसी रामतीर्थ सिंघल, बाबूलाल तिवारी, निवर्तमान उपसभापति सुशीला दुबे समेत अन्य ने पुष्प गुच्छ देकर प्रियंका को जीत की बधाई दी।
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सभी के समर्थन से उपसभापति निर्वाचित होने पर बेहद खुशी है। कोशिश रहेगी कि महानगर के विकास में अपना योगदान दे सकूं। सभी पार्षदों के कार्य हों, इसका भी प्रयास किया जाएगा।
प्रियंका साहू, उपसभापति
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अपना नाम सुनते ही प्रियंका बोल पड़ीं, ओह माई गॉड
प्रियंका के नाम का एलान जिलाध्यक्ष हेमंत परिहार ने नामांकन खत्म होने से महज पांच मिनट पहले 1:25 बजे किया। उपसभापति के टिकट को लेकर भाजपा में दो सप्ताह से रस्साकशी चल रही थी। दिनेश प्रताप सिंह, बंटी सोनी, प्रदीप खटीक, प्रवीण लखेरा एवं प्रियंका साहू के बीच टिकट की दावेदारी थी। हालत यह रही कि दो बार चुनाव टालना पड़ा। पार्टी नेता भी दुविधा में रहे। महापौर बिहारी लाल आर्य, विधायक रवि शर्मा, एमएलसी रामतीर्थ सिंघल, एमएलसी बाबूलाल तिवारी एवं जिलाध्यक्ष हेमंत परिहार कई चरणों में बैठक करने के बाद भी उम्मीदवार तय नहीं कर सके।
दोपहर में सभी पदाधिकारी नगर निगम पहुंचे। यहां भी उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा होती रही। नामांकन का समय खत्म होने के करीब पहुंच गया। दोपहर करीब 1:25 बजे जिलाध्यक्ष हेमंत परिहार ने प्रियंका गुप्ता का नाम घोषित किया। प्रियंका को भी इसकी उम्मीद नहीं थी। प्रियंका ने जैसे ही अपना नाम सुना, आश्चर्यचकित अंदाज में वह ओह माई गॉड बोल पड़ीं।
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क्रॉस वोटिंग की आशंका से सहमी रही भाजपा
उपसभापति चुनाव के दौरान भाजपा किसी तरह अपनी प्रतिष्ठा बचाने में भले कामयाब रही लेकिन, पूरे चुनाव के दौरान उसे सबसे अधिक क्रॉस वोटिंग की आशंका सताती रही। पार्षदों को एकजुट रखने के लिए जिलाध्यक्ष से लेकर एमएलसी तक पूरा समय निगम में डेरा डाले रहे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अंदरखाने में एक पार्षद की दावेदारी पर सर्वाधिक विरोध था। उनका नाम घोषित होने पर भाजपा पार्षदों ने बागी नामांकन कराने की पूरी तैयारी की थी। पार्टी नेताओं ने यह बात भांप ली थी। पार्टी का कोई दूसरा पार्षद नामांकन दाखिल न करने पाए, इसको रोकने के लिए ही अंतिम समय में उम्मीदवार घोषित किया।
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नामांकन तक सीमित रह गया विपक्ष
कार्यकारिणी में विपक्षी खेमे में तीन पार्षद हैं। विपक्षी खेमे ने आशीष का नामांकन करा दिया लेकिन, बहुत देर तक चुनावी मैदान में टिक नहीं सका। आखिरकार चुनाव लड़े बिना ही विपक्षी खेमे को पर्चा वापस लेना पड़ा।