छठ पूजा में खरना सोमवार को होगा। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जल व्रत रखेंगे। गुड़ की खीर व अन्य पूजा सामग्री छठ माता को अर्पित करेंगे। वहीं सूर्य को पहला अर्घ्य 13 नवंबर को दिया जाएगा। व्रतधारी श्रद्धालु शाम को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देंगे और रात में भजन गायन कर जागरण करेंगे। 14 नवंबर की सुबह चार बजे सभी श्रद्धालु जलाशयों पर जाकर डलियों व सूप में पूजन सामग्री, मौसमी सब्जियां, फल रखकर जल में खडे़ होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देंगे। मंगल गीत गाये जाएंगे और प्रसाद वितरण होगा। इसके बाद व्रत खोला जाएगा।
यह हैं मान्यताएं
छठ माता व भगवान सूर्य की पूजा उपासना रोगों से मुक्ति पाने तथा संतान की सुख समृद्धि के लिए की जाती है। पूजा अवसर पर कई लोग, जिनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं कोसी भरते हुए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को त्रेता युग में सीता जी ने, द्वापर युग में द्रोपदी, कर्ण और भीष्म पितामह ने किया था। सूर्य संहिता में वर्णित है कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी, षष्ठी, सप्तमी को छठ व्रत रखा जाता है।
यह बनता है प्रसाद में
चार दिवसीय छठ व्रत पूजा अवसर पर लौकी और चावल का प्रसाद बनता है। इसके अलावा आटा और गुड़ से बना ठेकुआ, गुड अथवा गन्ने के रस की मिठास से भरी खीर बनती है। पूजा में मौसमी सब्जी, फल आदि भी अर्पण किया जाता है।
एक हजार से अधिक लोग हैं बिहार व पूर्वांचल के
झांसी में बिहार और पूर्वांचल के एक हजार से अधिक लोग रहते हैं। जो पांच दशक पहले बसे थे। बिहार पूर्वांचल सांस्कृतिक कुटुंब के सदस्य रामबाबू यादव, हरनारायण यादव, सुदर्शन यादव ने बताया कि इनमें कई लोग सरकारी व प्राइवेट नौकरियों के अलावा व्यापार करते हैं। इनके अनुसार छठ पूजन में जरूरतमंद को नि:शुल्क पूजन सामग्री प्रदान की जाएगी।