दवाओं के लिए भी होगा इस्तेमाल
कृषि विवि में विकसित इस गुलाबी सेम में पाए गए एंथोसायनिन एंटीऑक्सीडेंट को देश-विदेश की लैब में भी भेजा जाएगा। यहां सेम से एंथोसायनिन एंटीऑक्सीडेंट निकालकर उसका इस्तेमाल दवाओं के लिए किया जाएगा।
गंभीर रोगों से लड़ने में सक्षम है सेम की यह किस्म
कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का दावा है कि सेम की यह किस्म लोगों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इसको भोजन में शामिल करने से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, तंत्रिका संबंधी रोग, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से लड़ा जा सकता है।
किसानों के लिए भी लाभकारी
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि एक एकड़ भूमि पर इस सेम की खेती 150 से 170 क्विंटल उपज देती है। इसकी बाजार में औसत कीमत 35 रुपये प्रति किलो होती है। वहीं, इसमें खर्च के नाम पर किसानों को केवल मचान बनानी होती है। वह चाहें तो नीचे धनिया, मैथी, आलू की भी पैदावार कर सकते हैं। जिससे किसानों को दोगुना लाभ मिल जाएगा।
तीन राज्यों की सेम की प्रजाति को कृषि फार्म पर चार साल के शोध में विकसित किया है। इस गुलाबी सेम में सामान्य सेम के मुकाबले एंथोसायनिन पिगमेंट एंटीऑक्सीडेंट 8.85 ग्राम पाया गया है। फिलहाल इस सेम को हमने पंजीकरण के लिए भेजा है। इसके बाद इसे स्टेट और सेंट्रल ट्रायल के लिए भेजा जाएगा। -डॉ. अर्जुन लाल ओला, सब्जी वैज्ञानिक, कृषि विवि
संस्थान के वैज्ञानिक फल, सब्जी, फूल और अनाज पर लगातार शोध कर रहे हैं। अब सेम की गुलाबी प्रजाति को विकसित किया गया है। यह सामान्य सेम के मुकाबले हर तरह से लाभकारी है। इसके बाजार में आने पर किसानों की आय निश्चित तौर पर बढ़ेगी और लोगों के भोजन में पोषक तत्वों का समावेश होगा। -डॉ. अशोक कुमार सिंह, कुलपति, केंद्रीय कृषि विवि।