झांसी। चितेरी कला प्रशिक्षण कार्यशाला में मंगलवार को बुंदेलखंड की लोक संस्कृति और स्वरोजगार की संभावनाओं पर जानकारी दी गई। प्रशिक्षक नीलम सारंगी ने प्रतिभागियों को बताया कि पारंपरिक चितेरी कला को आधुनिक डिजाइन और हस्तशिल्प उत्पादों से जोड़कर इसे बाजार में नई पहचान दिलाई जा सकती है।
इस दौरान नीलम सारंगी ने बताया कि चितेरी कला को आधुनिक उत्पादों, कॉर्पोरेट गिफ्ट्स, गृह सज्जा सामग्री और पर्यावरण अनुकूल हस्तशिल्प उत्पादों के साथ जोड़कर बाजार में स्थापित किया जा रहा है। कहा कि स्टार्टअप का उद्देश्य केवल उत्पाद बनाना नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की प्राचीन चितेरी कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना, स्थानीय महिलाओं एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। कार्यशाला में बच्चों ने बधाई, बरेदी, जवारा, करमा, राई, सैरा एवं अन्य लोकनृत्यों की विशेषताओं को समझते हुए उन्हें चितेरी कला के माध्यम से आकर्षक रूप में चित्रित किया। इस अवसर पर कला, संस्कृति और उद्यमिता के समन्वय का सुंदर उदाहरण देखने को मिला।