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Jhansi News: परागकण से हुई एलर्जी, सूंघने की क्षमता हो गई कमजोर

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- मेडिकल कॉलेज में ही 20 दिनाें में सौ से ज्यादा मरीज ये समस्या लेकर आए
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। फसलों से निकलने वाले परागकणों की वजह से इन दिनों सीजनल एलर्जिक राइनाइटिस के मरीजों में 20 गुना तक इजाफा हो गया है। बीमारी की वजह से मेडिकल कॉलेज में पिछले 20 दिनों में ही करीब सौ मरीज सूंघने की क्षमता कम हो जाने की समस्या लेकर आए हैं। ज्यादातर मरीजों को छींक आना, नाक से पानी आना, खुजली आदि की समस्या हो रही है। खासकर 15 फरवरी से 31 मार्च तक परागकण से एलर्जी का खतरा ज्यादा रहता है। मेडिकल कॉलेज के नाक, कान और गला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार कश्यप का कहना है कि इन दिनों फसल से निकलने वाले परागकण की संख्या बढ़ जाती है। नाक से सांस लेते समय सूक्ष्म परागकण नाक के जरिए फेफड़े में पहुंच जाते हैं, जो अस्थमा का कारण बन सकते हैं। जबकि, बड़े परागकण नाक में रुक जाते हैं। इससे एलर्जी हो जाती है।
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उन्होंने बताया कि एलर्जी की वजह से कोरोना की तरह ही सूंघने की क्षमता पर असर पड़ता है। पिछले 20 दिनों में ही करीब सौ मरीज इस एलर्जी के बाद ये समस्या लेकर ओपीडी में दिखाने आ चुके हैं। हालांकि, इलाज से ये ठीक भी हो जाती है। एलर्जी के मरीज भी 20 गुना तक बढ़ गए हैं। वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जेपी पुरोहित ने बताया कि परागकण से होने वाली एलर्जी से बहुत अधिक छींके आने, नाक बंद होने, नाक से पानी आने आदि समस्या हो जाती है। बीमारी का जितना जल्दी इलाज शुरू हो जाता है, वो उतनी जल्दी ठीक हो जाती है। इन दिनों ये समस्या लेकर काफी मरीज दिखाने आ रहे हैं।
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इन बातों का रखें ध्यान
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- धूल से बचाव करें
- संभव हो तो मास्क पहनें
- खेत के आसपास जाने से बचें
- एलर्जी शुरू होते ही इलाज कराएं
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