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झांसी, आगरा, मेरठ यूनिवर्सिटी के बीएड डिग्रीधारी शिक्षक रडार पर

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अध्यापक - फोटो : ???????
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झांसी। आगरा, मेरठ और झांसी यूनिवर्सिटी से बीएड समेत अन्य शैक्षणिक दस्तावेज लगाने वाले शिक्षक शासन के रडार पर हैं। इन शिक्षकों के दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाएगी। शासन ने जांच के लिए हर जिले में तीन-तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो फर्जी नियुक्तियों और अनियमितताओं को लेकर जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
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जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुदानित कॉलेजों में 633 शिक्षक, राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में 192, बेसिक शिक्षा विभाग में प्राइमरी और उच्च प्राइमरी में 4100 और नौ कस्तूरबा विद्यालयों में 113 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। अभी कस्तूरबा विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक प्रपत्र जमा कर लिए गए हैं। इन प्रपत्रों को सत्यापन के लिए बोर्ड और विश्वविद्यालयों को भेजा जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग में शासन स्तर पर निर्देशों का इंतजार है। हालांकि, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने विभाग के राजकीय एवं अनुदानित कॉलेजों से जानकारी तलब की है कि उनके यहां आगरा विश्वविद्यालय के 2004-05 सत्र के बीएड डिग्री धारी कितने शिक्षक कार्यरत हैं। इसके अलावा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और मेरठ यूनिवर्सिटी समेत कुछ अन्य शिक्षण संस्थानों से बीएड करने वाले शिक्षक रडार पर हैं। दरअसल, इन विश्वविद्यालयों से कई फर्जी डिग्रियां बनवाकर शिक्षक नौकरी पा चुके हैं। शिकायत होने पर कई शिक्षक पकड़े भी जा चुके हैं। ऐसे में यहां की डिग्री लगाने वाले शिक्षकों की गहनता से जांच की जाएगी। वहीं, फर्जी नियुक्तियों और अनियमितताओं की जांच के लिए शासन ने हर जिले में तीन-तीन सदस्यीय अधिकारियों की जांच टीम गठित की है। जानकारी के अनुसार सभी जिलों में उन शिक्षकों की भी जानकारी जुटाई जा रही है, जिन्होंने अपना पैन नंबर बदला है।
ये फर्जीवाड़ा हो चुका उजागर
झांसी में बीएड की फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी कर रहे छह शिक्षकों की पकड़ की जा चुकी है। यह शिक्षक वर्ष 2005 में नियुक्त हुए थे। इनमें पांच का स्थानांतरण प्रदेश के अन्य जिलों में हो गया था। इन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से बीएड की फर्जी डिग्री बनवा ली थी। सभी की सेवा समाप्ति करने के आदेश कर दिए गए थे। वहीं, बामौर में तैनात एक अन्य शिक्षक की वर्ष 2019 में सेवा समाप्त कर दी गई थी। इसकी बीएड की डिग्री बीयू की बताई गई है। यह सभी शिक्षक एसटीएफ की जांच एवं शिकायतों पर पकडे़ गए थे।
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