झांसी। हवाई अड्डे के निर्माण के लिए चिह्नित किए गए दोनों स्थानों की तुलनात्मक रिपोर्ट जिला प्रशासन ने तैयार कर ली है। इसमें ग्राफ सफा, मथुपरापुरा, चमरौआ व पठारी में चिह्नित की गई जमीन को एकदम उपयुक्त बताया गया है। जबकि, सेना की हवाई पट्टी के विस्तार की संभावनाओं को मुश्किल बताया गया है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अंतिम फैसला लेगा।
डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना की कार्यवाही अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। इसके लिए उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा जिले में पांच हजार हेक्टेअर जमीन खरीदी जा चुकी है। लखनऊ में हुए डिफेंस एक्सपो में यहां इकाई लगाने के लिए दो कंपनियों से करार भी हो गया है। जहाज निर्माण क्षेत्र की कंपनी टाइटन एविएशन एंड एयरोस्पेस इंडिया लिमिटेड तथा कारतूस बनाने की अग्रणी कंपनी स्टंप्स श्यूले एंड सोंप्पा लिमिटेड यहां अपनी इकाइयां लगाने जा रही हैं। इसके साथ ही हवाई अड्डे की निर्माण की दिशा में भी कार्यवाही तेज हो गई है।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने जिले में हवाई अड्डे की स्थापना के लिए पूर्व में चिह्नित किए गए दोनों स्थानों की तुलनात्मक रिपोर्ट मांगी है। जिला प्रशासन की ओर से ये रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। इसमें बताया गया है कि सेना की हवाई पट्टी के विस्तारीकरण के लिए बूढ़ा व सिमरधा गांव में 95.54 हेक्टेअर भूमि ही उपलब्ध रहेगी, जबकि ग्राम सफा, मथुपरापुरा, चमरौआ व पठारी में 182.31 हेक्टेअर जमीन की उपलब्धता है।
हवाई पट्टी के विस्तार के लिए नेशनल हाइवे - 75 की छह किलोमीटर तक शिफ्टिंग करनी होगी। इसके अलावा नहर भी छह किमी शिफ्ट करनी होगी। 42 आवासीय शहरी मकान, दुकानें, गोदाम व विद्युत लाइनें हटानी होंगी। जबकि, ग्राम सफा, मथुपरापुरा, चमरौआ व पठारी 30 ग्रामीण आवास, एक मंदिर खातीबाबा व विद्युत लाइनें शिफ्ट करनी होंगी। हवाई पट्टी पर शिफ्टिंग का व्यय अधिक आएगा, जबकि ग्राम सफा, मथुपरापुरा, चमरौआ व पठारी में यह व्यय बेहद कम होगा। रिपोर्ट में हवाई अड्डे की स्थापना के लिए सेना की हवाई पट्टी की जगह उक्त गांवों की भूमि को ज्यादा मुफीद बताया गया है।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को दोनों स्थानों की तुलनात्मक रिपोर्ट भेजी जा रही है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद प्राधिकरण फैसला लेगा। प्राधिकरण के निर्देश मिलते ही आगे की कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी। हवाई अड्डे के लिए जिले में जमीन की पर्याप्त उपलब्धता है। भविष्य में विस्तार की संभावनाएं भी बनी रहेंगी।
- शिवसहाय अवस्थी, जिलाधिकारी