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झांसी में भी बढ़ा प्रदूषण

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झांसी। शादी समारोह व देवोत्थान एकादशी पर देर रात तक हुई आतिशबाजी से झांसी में प्रदूषण का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। बृहस्पतिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 के करीब पहुंच गया, इससे कई लोगों की सांस फूलने लगी। इसी तरह अगर एक्यूआई और बढ़ा तो प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है।
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देवोत्थान एकादशी पर महानगर में चार सौ से अधिक शादियां हुईं। त्योहार पर पटाखे, अनार, फुलझड़ी आदि भी खूब चलाई गईं। यह सिलसिला देर रात तक चला। इसका असर बृहपतिवार को सुबह से ही देखने को मिला। धुंध छाई रही। जानकारों का कहना है कि तापमान में आ रही गिरावट से भी प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंचा। रात में पारा गिरने की वजह से तड़के धूल और धुआं ओस की बूंदों के साथ मिलकर निचली सतह पर आ जाते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। बृहस्पतिवार को यही हाल रहा, जिससे लोगों को सुबह से ही परेशानी हुई।
मास्क पहनेंगे तो नहीं होगी दिक्कत
कोरोना वायरस के दौर में मास्क पहनना अनिवार्य है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता का कहना है कि सांस के रोगी मास्क पहनेंगे तो प्रदूषण से होने वाली दिक्कत से भी बचे रहेंगे। जिन रोगियों को प्रदूषण में सांस लेने में दिक्कत होती है, वे जरूरत पर ही घर से निकलें। जब निकलें तो गमछा, तौलिया या मास्क से मुंह ढंके रहें।
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