झांसी। मंडल रेलवे से गुजरने वाली मालगाड़ियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली लागू होने जा रही है। इस तकनीक से चलती मालगाड़ियों के खुले, क्षतिग्रस्त या छेड़छाड़ किए गए दरवाजों की पहचान महज 30 से 35 सेकंड में हो सकेगी। जबकि वर्तमान में यही काम मैन्युअल जांच में 30 मिनट से एक घंटे लगता है। साथ ही मैन पॉवर अलग से लगाई जाती है। इस पर कवायद शुरू हो गई है।
रेल सुरक्षा बल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त (सीनियर डीएससी ) जितेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि उक्त तकनीक से हाई-स्पीड कैमरों, कंप्यूटर विजन और मशीन लर्निंग तकनीक की मदद से प्रत्येक वैगन के डोर लॉक की रियल टाइम निगरानी संभव होगी। यदि परिवहन के दौरान किसी वैगन का दरवाजा खुला मिलता है या उससे छेड़छाड़ होती है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। इससे माल की सुरक्षा बढ़ेगी और चोरी या दुर्घटना की आशंका भी कम होगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में 58 वैगनों वाली एक मालगाड़ी की जांच के लिए तीन से चार आरपीएफ कर्मियों की जरूरत पड़ती है। नई एआई प्रणाली यही काम कुछ ही सेकंड में पूरा हो जाएगा, जिससे समय के साथ-साथ मानव संसाधन की भी बड़ी बचत होगी। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) में उन्होंने तैनाती के दौरान और आईआईटी गुवाहाटी टेक्नोलॉजी इनोवेशन एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन ने मिलकर दृष्टि नामक इस एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम का विकास किया है। शुरुआती परीक्षण सफल रहे हैं और अब बड़े स्तर पर ट्रायल की तैयारी चल रही है। सफल परीक्षण के बाद इसे झांसी रेल मंडल के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर लागू किया जाएगा।