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फिर दलहन का हब बनाना है बुंदेलखंड को : सूर्य प्रताप शाही

Thu, 12 Jun 2025 02:04 AM IST
सचिन सोनी अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

सार

केंद्रीय कृषि विवि में प्रदेश के कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि  बुंदेलखंड को फिर दलहन फसल का हब बनाना है। कानपुर की पहचान दाल से थी, जो बुंदेलखंड से ही जाती थी।
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केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में किसानों को मूंगफली व फसलों की किट भेंट करते कृषि मंत्री। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झांसी। बुंदेलखंड को फिर दलहन फसल का हब बनाना है। कानपुर की पहचान दाल से थी, जो बुंदेलखंड से ही जाती थी। किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच तो कराते हैं मगर उपचार नहीं करते हैं। इससे पैदावार में सुधार नहीं होता है। ये बातें बुधवार को रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि में प्रदेश के कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कही।
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विवि में बुधवार को दूरदराज से आए किसानों को संबोधित करते हुए मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत फसल की कटाई, जमीन की गुणवत्ता बनाए रखने, ज्यादा पैदावार की तकनीक के बारे में कृषि वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों को बता रहे हैं। किसान अपने क्षेत्र की जलवायु, जमीन की गुणवत्ता को नजरअंदाज कर पैदावार करते हैं, जिससे फसलों का उत्पादन खराब होता है। सरकार कोशिश कर रही है कि सभी किसानों से वैज्ञानिक सीधा संवाद करें। न सिर्फ अच्छी पैदावार के बारे में बल्कि योजनाओं के बारे में भी बताया जा रहा है। 
बुंदेलखंड में दाल की पैदावार घटी तो खत्म हो गई कानपुर की पुरानी पहचान -
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के किसान दलहन की खेती करें। दलहन की खेती से नाइट्रोजन (यूरिया) का स्तर बढ़ता है, जिसे यूरिया डालने की जरूरत नहीं पड़ती है। पांच-छह साल पहले बुंदेलखंड में पहाड़ व पत्थर की जमीन थी। अब तालाब भी है, जिससे जमीन उपजाऊ बनी है। बुंदेलखंड में दाल की काफी पैदावार होती थी। अब किसान धान आदि उगा रहे हैं। कानपुर की दाल की पूरे देश में पहचान थी, जो खत्म हो गई है। इसकी वजह बुंदेलखंड में दाल की कम पैदावार होने की वजह से कानपुर में कम आपूर्ति होना है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में मूंग की फसल लहलहा रही है।
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वहीं, कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एके सिंह ने कहा कि मक्का की पैदावार में झांसी ने रिकॉर्ड तोड़ा है। किसान मूंगफली की पैदावार में पुराने बीज का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे पैदावार उम्मीद से कम हो रही है। इस दौरान प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. एसके सिंह, गोसेवा आयोग अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, विधायक गरौठा जवाहर राजपूत, सीडीओ जुनैद अहमद आदि मौजूद रहे।
दो घंटे का इंतजार और कार्यक्रम चला सिर्फ 22 मिनट
झांसी। कृषि विवि में आयोजित संवाद कार्यक्रम में सुबह 11.30 बजे से किसानों का आना शुरू हो गया। 12 बजे तक सभी बैठकर मंत्री के आने का इंतजार करते रहे। मंत्री दोपहर करीब दो बजे आए और 22 मिनट में कार्यक्रम संपन्न हो गया।
मंत्री हुए खफा बोले, इधर-उधर होता रहूं
मंत्री अपना भाषण देकर अपनी सीट की तरफ जा रहे थे, तभी उन्हें बताया गया कि किसानों को किट देनी है। जब वह खड़े हुए तो मंच से नीचे आने के लिए कहा गया। इस पर वह खफा हो गए और बोले ‘क्या मैं इधर-उधर होता रहूं’। अनुरोध करने पर उन्होंने सिर्फ दो किसानों को किट दी और चले गए। वहींं, मंच से उतरने के बाद गुस्साए मंत्री ने कुलपति से नाराजगी जताते हुए कहा कि न तो व्यवस्थाएं सही हैं और न ही संचालन। आगे से व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
जिले के किसानों को मिलेगी दलहन की मिनी किट
सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि जिले के किसानों को दलहन (तिल, उड़द व मूंग) की 20 हजार मिनी किट वितरित की जाएगी। इसमें तिल की 9886, मक्का की 2400 व 8714 मूंग की किट होंगी। प्रत्येक किट में दो किलो बीज होगा। किसानों के खेतों में 3600 कुंतल मूंगफली के बीज का प्रदर्शन (डेमोस्ट्रेशन) होगा। वैज्ञानिकों ने बताया कि एक हेक्टेयर में एक कुंतल बीज का प्रयोग होता है।
खेत पर तालाब के लिए 50 फीसदी सब्सिडी दे रही सरकार
बुंदेलखंड में जल संरक्षण पर सरकार का पूरा फोकस है। इसलिए तालाबों को बनाने पर 50 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है। बुंदेलखंड में 900 से ज्यादा तालाब है। यदि कोई किसान अपने खेत में तालाब बनवाना चाहता है तो कृषि विभाग की साइट पर आवेदन करें।
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