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राम जाने क्या होगा, ‘पौष’ में ‘वसंत’ का अहसास!

Wed, 30 Dec 2015 12:42 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। जनवरी आने को है, परंतु ठंड ने अब तक तल्खी नहीं दिखाई है। पिछले सालों की तुलना में इस बार पारा चढ़ा हुआ है। पौष में वसंत ऋतु का अहसास हो रहा है। इससे एक बार फिर फसल खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। किसान परेशान हैं और शासन-प्रशासन में बेचैनी की स्थिति है। सूखे से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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कड़ाके की ठंड के मौसम में भी आजकल दिन में गर्मी का अहसास हो रहा है। रात में भी ज्यादा सर्दी नहीं हो रही है। कोहरे की तो इस सीजन में अब तक शुरुआत भी नहीं हुई है। तापमान तीन साल में सर्वाधिक है। साल 2012 में 29 दिसंबर को अधिकतम तापमान 19 व न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस था। साल 2014 में इसी तिथि को अधिकतम तापमान 19 व न्यूनतम छह डिग्री सेल्सियस था। जबकि, इस साल न्यूनतम 12 व अधिकतम 26 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है।

मौसम के इस बदले हुए मिजाज का सबसे बुरा असर कृषि पर पड़ रहा है। मिट्टी में नमी न होने की वजह से पहले से ही जिले में रबी की बुआई कम रकबे में हुई है। जिले के जिन इलाकों में फसल बोई भी गई है, तो वहां से भी ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं। सूखे से निपटने के लिए शासन ने गाइड लाइन जारी कर दी है।
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अफसर गांवों की ओर दौड़ने लगे हैं। मनरेगा के तहत बुंदेलखंड क्षेत्र में मानव दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 कर दी गई है। शत प्रतिशत मनरेगा मजदूरों को रोजगार देने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो-दो काम शुरू करने की तैयारी है।

भयावह हैं हालात
झांसी। मौसम की लगातार दगेबाजी से जिले में कृषि का बुरा हाल है। पिछले रबी सीजन में पकी हुई फसल बारिश व ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई थी। खरीफ सीजन में सूखे ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अब भी कुदरत रहम नहीं कर रही है। बारिश न होने से मिट्टी इस रबी की फसल के लिए तैयार नहीं है, जिससे यहां बुआई में पचपन फीसदी तक की कमी आई है।

फसल-बुआई का लक्ष्य-हुई बुआई
गेहूं-1,55,904-68,312
जौ-7,394-5,270
सरसों-9,387-4,324
चना-46,846-36,248
मटर-52,683-43,620
(लक्ष्य और बुआई के आंकड़े हेक्टेअर में)

कम निकलेंगी गेहूं की कलम
झांसी। तापमान में बढ़ोत्तरी फसलों के लिए खतरे की घंटी है। सिंचित क्षेत्रों में भी उत्पादन में भारी कमी की संभावना जताई जा रही है।

जिला कृषि अधिकारी के अनुसार वातावरण गर्म होने की वजह से जहां सिंचाई के साधन हैं, वहां भी समस्या आएगी। गेहूं के पौधों में कलमों की संख्या कम होगी। उनकी बढ़ोत्तरी भी नहीं होगी। बालियां जल्दी आ जाएंगी, छोटी-छोटी रहेंगी। सरसों के दाने पिचके हुए रहेंगे। कमोबेश यही स्थिति चना की भी रहेगी।

नमी के लिए पानी में भिगोएं बीज
झांसी। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि बेहतर होगा कि जिन क्षेत्रों में अभी गेहूं की बुआई नहीं हुई है, वहां किसान पहले बीज दो-तीन दिन पानी में भिगोएं, जिससे उसमें नमी आ जाएगी। बीज को विकसित होने में मदद मिलेगी। उत्पादन बढ़ाने को गेहूं के बीज ज्यादा मात्रा में बोएं। मटर में नमी के लिए संभव हो तो स्प्रिंकलर से सिंचाई करें।

मौसम का यही रहने वाला है मिजाज
झांसी। क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र भरारी के वैज्ञानिक डा. वी के सिंह ने बताया कि तापमान में बढ़ोत्तरी शुभ संकेत नहीं है। मौसम के इस मिजाज में जल्द बदलाव की संभावनाएं भी नहीं दिख रही हैं। मकर संक्रांति के इर्दगिर्द जरूर तापमान में गिरावट की संभावना है।
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