झांसी। बुंदेलखंड में सूखे की हकीकत का पता लगाने के लिए दौरे पर आई भारत सरकार की टीम का नेतृत्व कर रहे केंद्रीय कृषि सहकारिता एवं कृषक मंत्रालय के निदेशक अतुल पटने ने स्वीकार किया कि बारिश न होने से यहां तिल को छोड़ अन्य फसलों में 33 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है। उन्होंने माना की सामान्य से केवल पैंतालिस फीसदी बारिश होने की वजह से खरीफ की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
क्षेत्र के दौरे से लौटकर शुक्रवार को झांसी पहुंचे निदेशक ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन ने पूर्व में उक्त रिपोर्ट उपलब्ध कराई थी। इससे वह पूरी तरह से सहमत हैं। कई गांवों के भ्रमण व किसानों से बातचीत के बाद उन्होंने माना की बारिश न होने से उड़द, अरहर आदि खरीफ फसलों को क्षति हुई है।
खासतौर सुदूर इलाकों में ज्यादा बर्बादी हुई है, जहां सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं है। जबकि, उन्होंने तिल की फसल में ज्यादा नुकसान नहीं माना। केंद्रीय अधिकारी ने कहा कि सूखे के संबंध में अंतिम फैसला क्रॉप कटिंग की रिपोर्ट बनने के बाद लिया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से क्रॉप कटिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पूरी होने पर भारत सरकार इसकी पुष्टि के लिए टीम भेजेगी।
नहर काटने व अन्ना प्रथा से दिखे असंतुष्ट
कृषि सहकारिता एवं कृषक मंत्रालय के निदेशक अतुल पटने ने नहर काटे जाने पर असंतोष जताया। कहा कि बुंदेलखंड भ्रमण के दौरान उन्होंने देखा कि लोग नहर काटकर पानी अपने खेतों में भर लेते हैं। इससे नहर के आखिरी छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता है, जिससे फसल बर्बाद होती है। मानवीयता की दृष्टि से लोगों को इससे बचना चाहिए। साथ ही उन्होंने अन्ना प्रथा पर भी गहरा असंतोष जताया।
धरने पर बैठे किसानों को डीएम ने उठाया
बुंदेलखंड को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर किसानों ने सर्किट हाउस में प्रदर्शन किया। किसान नेता जवाहर लाल राजपूत के नेतृत्व में पहले किसान सर्किट हाउस परिसर में धरने पर बैठे रहे। इसके बाद सर्किट हाउस के भीतर मुख्य दरवाजे पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान जिलाधिकारी अनुराग यादव सर्किट हाउस पहुंचे।
उन्होंने किसानों से उठने को कहा, परंतु वह नहीं माने। इस पर जिलाधिकारी ने किसान नेता जवाहर लाल राजपूत का हाथ पकड़कर उठाकर भीतर ले गए। अंदर उनकी मुलाकात कृषि सहकारिता एवं कृषक मंत्रालय के निदेशक अतुल पटने से कराई। निदेशक को किसानों ने सूखे से उपजी विषम परिस्थितियों के बारे में बताया।
साथ ही क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की। इस दौरान प्रबल प्रताप सिंह के नेतृत्व में बबीना के किसानों ने बीस ग्रामों में नहर खुदवाने की मांग की। इनके अलावा किसान नेता गौरीशंकर बिदुआ व महेंद्र शर्मा ने भी विभिन्न समस्याएं उठाईं।