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कृषि विश्वविद्यालय : दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों पर अधिक शोध की जरूरत

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संवाद न्यूज एजेंसी

झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में 11वें स्थापना दिवस पर शुष्क भूमि क्षेत्रों में टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के लिए विस्तार रणनीतियां विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इस दौरान दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों पर अधिक शोध की जरूरत पर बल दिया गया।



मुख्य अतिथि डॉ. त्रिलोचन महापात्रा (पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के चेयरमैन) रहे। अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. अरविंद कुमार (संस्थापक कुलपति, कृषि विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्य अतिथि ने कहा कि भारत की बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा एवं सतत कृषि के लिए रणनीतिक उपाय आवश्यक हैं। उन्होंने सटीक कृषि, डिजिटल तकनीक एवं ड्रोन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति एवं पद्मश्री डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान है। उन्होंने शोध पर बल दिया।
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कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए तीव्र गति से शोध कार्य किए जा रहे हैं। कहा कि सरसों, मूंगफली और तिल जैसी फसलों की अपार संभावनाएं हैं। बुंदेलखंड एवं देश के अन्य राज्यों से भी किसानों और विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय का भ्रमण कर नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी ली है। संचालन डॉ. अर्तिका सिंह ने किया। आभार कार्यक्रम सचिव डॉ. श्रीधर पाटिल ने व्यक्त किया।
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डाक विभाग ने जारी किया स्पेशल कवर



प्रवर डाक अधीक्षक वरुण मिश्रा ने बताया कि भारतीय डाक विभाग ने इस मौके पर रानी लक्ष्मीबाई कृषि विश्वविद्यालय का स्पेशल कवर जारी किया है। यह प्रत्येक डाकघर में उपलब्ध रहेगा। इस विशेष अनावरण पर इसे संग्रहित किया जाएगा। इसके साथ ही इसे संग्रहालय में भी भेजा जाएगा।
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