झांसी। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं में भी अपने पांव पर खड़े होने की चेतना पैदा हुई है। झांसी के कई ब्लॉकों की महिलाएं खेती, किसानी की दिशा बदलने का काम कर रही हैं। परंपरागत खेती के बजाए वह जैविक खेती को तरजीह दे रही हैं। गुरसराय, बबीना एवं बड़ागांव जैसे ब्लॉकों में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दर्जनों महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद खेती भी शुरू कर दी है।
कोविड प्रकोप की वजह से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गांव वापस लौटे हैं। इनमें महिलाएं भी हैं। इन महिलाओं को गांव में ही रोजगार बढ़ाने के गुर बताए जा रहे हैं। इसमें जैविक खेती की राह महिलाओं को खूब लुभा रही है। उपायुक्त स्वरोजगार डॉ.नागेंद्र नारायण मिश्र के मुताबिक गेहूं, धान के साथ ही पोषक वाटिका तैयार करना सिखाया जा रहा है। जैविक उत्पादों की मांग को देखते हुए जैविक रीति से उत्पादन की ओर अधिक जोर दिया जा रहा है। हालांकि महिलाओं को खेती-किसानी की ओर आगे बढ़ाने के लिए कई वर्ष पहले ही महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना शुरू हुई थी लेकिन, महिलाओं ने हाल में इसमें दिलचस्पी लेनी शुरू की है।
गुरसराय ब्लॉक में कुल 3500 महिलाएं इस मुहिम से जुड़ी हैं। प्रशिक्षण के बाद इन महिलाओं ने खेत, खलियान समेत आसपास की खाली जगहों में पोषक वाटिकाएं लगाईं। जैविक रीति से इन पोषक वाटिकाओं में सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। रसायानिक खाद की जगह वर्मी कांपोस्ट का इस्तेमाल होता है। इसे अपनाने वाली महिलाओं की संख्या में लगातार बढ़ रही है। कुछ दिनों पहले ही बबीना एवं बड़ागांव की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 75 महिलाओं ने भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। अब यह महिलाएं अपने-अपने गांव में पोषण वाटिकाएं बना रही हैं। उपायुक्त का कहना है कि पोषण वाटिकाओं के माध्यम से इनको जैविक खेती से परिचित कराया जा रहा है। गुरसराय की कई स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस बार धान भी खेतों में लगाया है।
हम लोगों का समूह भी पोषण वाटिका तैयार कर रहा है। जैविक विधि से हम लोग सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। अभी यह हम लोगों की शुरूआत कर रहे है। काम अच्छा होने पर इसे आगे बढ़ाएंगे।
भावना चौहान
गौढ़बाबा स्वयं सहायता समूह, सरवां, बबीना