झांसी। हवाई अड्डे की उम्मीद अभी जगी हुई है। झांसी में हवाई पट्टी को हवाई अड्डे के रूप में विस्तारीकृत करने के लिए एक बार फिर केंद्र और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मिलकर संभावनाओं की तलाश की। पत्रकारों से बातचीत में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव आरएल चौबे ने कहा कि हवाई अड्डे के लिए 80 एकड़ जमीन की और आवश्यकता है। यह जमीन राज्य सरकार मुहैया करा देती है और एनएचएआई की योजना में प्रस्तावित फ्लाई ओवर का कर्व बदल दिया जाता है तो हवाई अड्डे के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा।
केंद्रीय उड्डयन मंत्रालयों के अफसरों की झांसी के जिलाधिकारी के साथ बैठक को ठंडे बस्ते में पड़ी हवाई अड्डे की योजना को अब नए सिरे से क्रियान्वित करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव चौबे के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें इस मुद्दे पर गंभीर हैं और लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि झांसी की एअर स्ट्रिप का जायजा लिया गया, तो पता चला कि यहां बड़े हवाई जहाज उतरने लायक स्थिति में नहीं है।
शासन-प्रशासन से हवाई पट्टी के विस्तारीकरण को और जमीन मुहैया कराने की मांग की गई है। इसके अलावा यह भी पता चला है कि हवाई पट्टी के पास ही फ्लाई ओवर बन रहा है। अगर इसकी दिशा में बदलाव हो जाता है और जमीन मिल जाती है तो फिर हवाई अड्डे का निर्माण किया जा सकेगा।
वरना राज्य सरकार से कहीं और जमीन उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी। इसको लेकर भी प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत की गई है। उधर, जिलाधिकारी अनुराग यादव ने बताया कि सफा चमरुआ में हवाई अड्डे के निर्माण को भी प्रस्ताव तैयार किया गया है, लेकिन पहले फोकस ग्वालियर रोड की हवाई पट्टी के विस्तारीकरण पर ही है।
एएआई करेगी सर्वे
ग्वालियर रोड हवाई पट्टी पर बड़े हवाई जहाज की लैंडिंग और टेक ऑफ की वस्तुस्थिति जानने के लिए जल्द ही एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ऑब्सटेकल सर्वे करेगी। इसके बाद यदि अतिरिक्त जमीन की भी मंजूरी मिल जाती है, तब हवाई अड्डे के निर्माण को हरी झंडी मिल जाएगी। मालूम हो कि किसी भी हवाई अड्डे की मंजूरी को एएआई की स्वीकृति आवश्यक होती है।
रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम शुरू
जनता को बेहतर विमानन की सुविधा मिल सके, इसके लिए केंद्र सरकार ने रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम शुरू की है। इसके अंतर्गत राज्यों में उन हवाई पट्टियों का चिह्निकरण किया जा रहा है, जहां हवाई जहाज नहीं उड़ रहे हैं। इसी योजना में झांसी भी शामिल है। वहीं, निजी एयरलाइंस को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार ने भी एक स्कीम शुरू की है। इसके अंतर्गत यदि हवाई अड्डे पर प्राइवेट प्लेन उतरता है तो उस एयरलाइंस की आधी सीटें सरकार खरीद लेगी। वहीं, ईंधन और वैट में काफी छूट मिलेगी। इसके अलावा कई तरह के चार्ज से एयरलाइंस को राहत दी जाएगी।
‘करोड़ों’ को लेकर जारी नूरा कुश्ती
हवाई अड्डे बनाने को लेकर केंद्र और राज्य के बीच ‘करोड़ों’ को लेकर नूरा कुश्ती जारी है। जानकारों ने बताया कि केंद्र सरकार चाह रही है कि ग्वालियर रोड हवाई पट्टी का ही एअरपोर्ट के रूप में विस्तार हो जाए। इसके लिए केंद्र को इन्वेस्टमेंट कम करना पड़ेगा और महज चालीस से पचास करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। जबकि, राज्य को जमीन उपलब्ध करानी पड़ेगी, जिसकी कीमत डेढ़ सौ करोड़ आंकी जा रही है।
वहीं, राज्य सरकार की सोच है कि जब उसे जमीन देनी ही है तो नए स्थान पर नया हवाई अड्डा बने। हालांकि, राज्य की इस स्कीम पर केंद्र का पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक व्यय होगा। हालांकि, डीएम अनुराग यादव का कहना है कि हवाई पट्टी को लेकर जो अतिरिक्त जमीन की मांग की गई है, पहले उसी का समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। यदि किसी कारणवश ऐसा नहीं हो पाता तब नए प्रस्ताव पर मंत्रालय के अधिकारियों से विचार किया जाएगा।