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Jhansi News: कैंसर से जंग जीतकर हस्तकला की दुनिया में बनाया मुकाम

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर करने के बाद रक्षिता शर्मा ने कई एनजीओ में छह साल तक नौकरी की लेकिन उनका लक्ष्य तो अपने साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। उन्होंने नौकरी छोड़कर राजस्थानी हस्तशिल्प को सहेजने का काम शुरू किया ही था कि कैंसर जैसे असाध्य रोग ने घेर लिया। दो सर्जरी कराने के बाद उन्होंने कैंसर की जंग भी जीत ली। अब वह तारा और अंबरदारी नाम से दो फर्म संचालित कर रही हैं।



सीपरी बाजार की रहने वाली रक्षिता शर्मा बताती हैं कि कोई भी व्यापार छोटे स्तर पर शुरू कर सकते हैं। इसके लिए भारी भरकम निवेश की जरूरत नहीं है। उन्होंने राजस्थानी, बुंदेली सहित कई हस्तशिल्प की बारीकियों को सीखने के बाद इनका काम शुरू किया। जरी जरदोजी, बनारसी शिल्प के साथ ही जूट, मूंज की घास की वस्तुओं को बनाकर राइज इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़ीं। उनकी कला लोगों को भाने लगी तो ऑर्डर भी मिलने शुरू हो गए। आज वह झांसी, ललितपुर, मऊरानीपुर के अलावा राजस्थान, वाराणसी तक के कारीगरों से काम कराती हैं।
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उन्होंने तारा नामक फर्म से शुरुआत की। अब अंबरदारी के तहत वह घरेलू उत्पाद और कपड़ों का कार्य कर रही हैं। रक्षिता का मानना है कि महिलाओं के लिए आर्थिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। वह इस दिशा में प्रयास भी कर रही हैं। अपनी फर्मों के माध्यम से 50 से ज्यादा महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ रखा है। उनका कहना है कि आज भी हस्तकलाओं से संबंधित कार्यों के लिए दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। उनका सपना है कि झांसी में एक ऐसी यूनिट तैयार की जाए, जहां हस्तशिल्प और हस्तकलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सभी सामग्री उपलब्ध हों। इसके अलावा, वह ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को अपने व्यापार से जोड़कर स्वावलंबी बनाना चाहती हैं।
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