झांसी। जनता अपने माननीय को क्षेत्र की समस्याओं की आवाज उठाने के लिए नगर निगम सदन में चुनकर भेजती है, लेकिन नगर निगम में 31 पार्षद ऐसे हैं जो आज तक खामोश रहे हैं। साढ़े तीन साल में नगर निगम सदन की 12 बैठकें हो चुकी हैं। मगर केवल 29 पार्षदों ने ही समय-समय पर बैठकों में जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से सवाल दागे हैं। पार्षद जनता की आस और आवाज अफसरों तक पहुंचाने में नाकाम हैं।
नगर निगम में 60 निर्वाचित पार्षद हैं। महानगर के विकास को लेकर महापौर-पार्षद अधिकारियों के साथ सदन में बैठकर खाका तैयार करते हैं। नगर निगम में साल 2017 से अब तक सदन की 12 बैठकों का आयोजन हो चुका है। हर बार बैठक के दौरान पार्षद अपने क्षेत्र और महानगर की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से सवाल पूछकर आवाज उठाते हैं। मगर झांसी नगर निगम में महज 29 पार्षद ऐसे हैं, जो जनता की आवाज बन सके हैं। जबकि 31 पार्षद अपने क्षेत्र और महानगर की जनता की आवाज उठाने की बजाय खामोश रहे हैं। बैठकों की स्थिति पर गौर किया जाए, तो गिने-चुने ही पार्षद मुद्दों को लेकर अधिकारियों को घेरते हैं और बिगड़ी व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए आवाज उठाते हैं। इससे साफ है कि नगर निगम के अधिकांश पार्षद अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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ये पार्षद लगातार उठाते रहते हैं आवाज
जामवती, शांति इंदु वर्मा, विमल किशोर, कांति छत्रपाल, अरविंद कुमार बबलू, पुष्पेंद्र कुमार, महेश गौतम, जुगल किशोर, अमन राय, गोविंद शर्मा, भरत सेन, उमेश जोशी, सुरेंद्र साहू, विद्या प्रकाश दुबे, दिनेश प्रताप सिंह बंटी राजा, राजेश त्रिपाठी, कन्हैया कपूर, सुलेमान मंसूरी, सुशीला गोकुल दुबे, किशोरी प्रसाद रायकवार, विकास खत्री, लखन कुशवाहा, रमा कुशवाहा, प्रियंका साहू, दिनेश प्रताप सिंह दीपू, मुकेश सोनी बंटी, प्रदीप नगरिया, निर्दोष अग्रवाल।
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खामोश पार्षदों को चेताते रहे हैं महापौर
नगर निगम सदन की बैठकों में महापौर रामतीर्थ सिंघल ने भी कई बार तमाम मुद्दे उठाए हैं। महानगर के विकास को लेकर उन्होंने बैठकों में लगातार सुझाव और मुद्दों पर अधिकारियों से सवाल भी किए हैं। इसके साथ ही वे लगातार खामोश रहने वाले पार्षदों को सदन में बोलने के लिए मौका दिलवाते हैं। पिछले सदन की बैठक में उन्होंने पार्षदों को बोलने के लिए आमंत्रित किया था।
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अब तक हुई सदन की बैठकों की तिथियां
12 दिसंबर 2017, 06 जनवरी 2018, 17 मार्च 2018, 11 अगस्त 2018, एक सितंबर 2018, एक दिसंबर 2018, 15 जून 2019, 13 नवंबर 2019, 23 नवंबर 2019, 28 दिसंबर 2019, 19 सितंबर 2020, छह मार्च 2021
सदन की बैठकों में हर पार्षद अपनी समस्याएं लेकर आता है, लेकिन कई बार पार्षदों को बोलने का मौका ही नहीं मिल पाता। समय अधिक हो जाने पर तमाम पार्षद अपने पत्र देकर चले जाते हैं। मैनें सदन में कहा भी है कि हर पार्षद के बोलने के लिए समय तय किया जाना चाहिए।- दिनेश प्रताप सिंह बंटी राजा, नेता सदन, सत्ता पक्ष
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सदन की बैठकों में अधिकारी पार्षदों के सवालों के जवाब नहीं दे पाते। कई बार बैठकों को बीच में रोक दिया जाता है। तमाम पार्षद सदन में बोलना चाहते हैं। खासकर महिला पार्षदों को सदन में बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।- महेश गौतम, नेता सदन, विपक्ष
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नगर निगम सदन में सभी पार्षदों को समान रूप से बोलने का मौका दिया जाता है। मैंने कई बार पीछे बैठने और पीछे रहने वाले पार्षदों को बोलने का मौका देने की पहल की है। पार्षद जनता की आवाज हैं। पार्षदों को भी चाहिए कि वे भी अपने क्षेत्र और नगर की समस्याओं को समान रूप से सदन के संज्ञान में लाएं।- रामतीर्थ सिंघल, महापौर