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आपरेशन होने के बाद भी फिर से सामने आए ब्लैक फंगस के लक्षण, डाक्टर भी हैरान

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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती ब्लैक फंगस के मरीजों में फिर से यह बीमारी होने की आशंका जताई जा रही है। एक-दो मरीजों में ऑपरेशन के बाद माइक्रो पार्टिकल रह जाने से दोबारा फंगस का खतरा लग रहा है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस लगभग 20 मरीजों का ऑपरेशन हो चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद मरीजों को एम्फोटेरेसिन बी इंजेक्शन लगाया जाता है। ये इंजेक्शन ऑपरेशन के बाद छूट गए फंगस के माइक्रो पार्टिकल को खत्म करने का काम करते हैं। हालांकि, मेडिकल कॉलेज को ये इंजेक्शन मिल तो रहे हैं मगर इनकी मांग कहीं अधिक है। बताया गया कि एक मरीज को चार से छह इंजेक्शन प्रतिदिन लगते होते हैं। ऑपरेशन के बाद 20 दिनों तक ये कोर्स चलता है। कोर्स के मुताबिक तो एक भी मरीज को पूरे इंजेक्शन नहीं लगे हैं। वहीं, निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को तो इक्का-दुक्का ही इंजेक्शन मिलना ही मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार को ही एक मरीज ऐसा भर्ती हुआ है, जिसका ऑपरेशन बाहर हुआ मगर फिर से ब्लैक फंगस हो जाने की आशंका जताई जा रही है। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कश्यप ने बताया कि मरीज की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। हालांकि, उन्होंने बताया कि यदि किसी मरीज को दोबारा ब्लैक फंगस हो जाती है तो फिर से ऑपरेशन करना पड़ता है।
200 इंजेक्शन मिले, सौ से ज्यादा लगे
मेडिकल कॉलेज को 200 एंटी फंगल इंजेक्शन मिल गए हैं। यह पहला मौका है, जब इतनी बड़ी मात्रा में इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। हालांकि, आते ही सौ से अधिक इंजेक्शन ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों को लगा दिए गए। जल्द ही कुछ और इंजेक्शन मिल सकते हैं।
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दो और मरीज मिले, भर्ती
ब्लैक फंगस के दो और मरीज सामने आए हैं। इन मरीजों को मेडिकल कॉलेज के ईएनटी वार्ड में भर्ती कराया गया है। जल्द ही इन मरीजों का डॉक्टर ऑपरेशन कर सकते हैं। एक मरीज की आंख के पास तक फंगस पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
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