फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बंगलादेशी अशोक को 55 साल बाद मिलेगी भारत की नागरिकता

विज्ञापन
झांसी। बांग्लादेशी नागरिक खबर के साथ ----------- अशोक कुमार सरकार अपनी पत्नी अपर्णा के साथ। - फोटो : REPORTERS
विज्ञापन
झांसी। दो साल की आयु में पिता की अंगुली थामकर एक मासूम बच्चा बांग्लादेश से भारत आया था। इसी धरती पर उसे नाम मिला और पहचान मिली। लेकिन, उम्र के 55 साल यहां गुजारने के बाद भी देश की नागरिकता नहीं मिल पाई। जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं बबीना निवासी अशोक कुमार सरकार की, जिनके दिल को नागरिकता कानून लागू होने के बाद बड़ी राहत मिल पाई है, नहीं तो हर समय यही लगा रहता था कि न जाने कब उन्हें भारत छोड़ने का फरमान सुना दिया जाए।
विज्ञापन

बांग्लादेश से नारायण चंद्र सरकार 1964 में अपने दो बेटों के साथ भारत आ गए थे। उनके सारे रिश्ते - नातेदार पहले से ही यहां थे। शुरुआत में वे पश्चिम बंगाल में रहे और बाद में झांसी के बबीना कस्बे में अपने करीबी रिश्तेदार के साथ रहने लगे। 2007 में नारायण चंद्र की मृत्यु हो गई। उनका एक बेटा अशोक कुमार सरकार यहीं रह रहा है। जबकि, उनके भाई कमलेश मध्य प्रदेश के रायसेन में रह रहे हैं। अशोक कुमार को भारत में रहते हुए 55 साल गुजर चुके हैं। यहीं वे पढ़े - लिखे और चिकित्सक बन गए। दतिया निवासी अपर्णा से उनकी शादी हुई और दो बच्चे हैं। नाम, काम, पहचान, परिवार सबकुछ उनका यहीं है, नहीं है तो सिर्फ नागरिकता, जिसे लेकर वे और उनका परिवार हमेशा परेशान रहता था।
अशोक कुमार ने बताया कि देश में जब भी विदेशी नागरिकों को लेकर बहस चलती थी, उनकी रातों की नींद उड़ जाती थी। हर समय अनिश्चितता का माहौल बना रहता था, आगे जाने क्या होगा, डर लगा रहता था कि कहीं उन्हें देश छोड़ने का फरमान न सुना दिया जाए, ऐसे में वे कहां जाएंगे, अब तो बंाग्लादेश में भी उनका कोई नहीं। लेकिन, नागरिकता कानून के अस्तित्व में आने के बाद से उनकी चिंताएं दूर हो गईं हैं। अब वे भी भारत में भारत के नागरिक की हैसियत से रह सकेंगे।
विज्ञापन

नागरिकता न होने पर जाना पड़ा था जेल
भारत की नागरिकता न होने की वजह से अशोक सरकार को जेल तक जाना पड़ गया था। बबीना थाना पुलिस ने सन 1992 में 3/14 विदेशी अधिनियम के तहत उनके खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया था, जिसके चलते अशोक कुमार को जेल भेज दिया गया था। वर्तमान में उच्च न्यायालय इलाहाबाद की जमानत पर चल रहे हैं।
शासन ने मांगी थी सूचना
नागरिकता कानून लागू होने के बाद शासन के निर्देश पर बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से आए व्यक्तियों को चिह्नित करने का काम किया जा रहा है। इसके लिए शासन ने तत्काल सर्वे कर रिपोर्ट उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में अशोक कुमार सरकार का नाम भेजा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें