आवास खाली नहीं करने पर अन्य पुलिसकर्मी परेशान हो रहे है।
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अफसरों पर भारी पुलिसकर्मी, नहीं छोड़ रहे आवासों पर कब्जे
झांसी। कानून का पाठ पढ़ाने वाले पुलिसकर्मी खुद ही कब्जों पर उतारू है। गैर जनपद स्थानांतरण हो जाने के बाद भी पुलिसकर्मी सरकारी आवासों को खाली नहीं कर रहे है। इससे गैर जनपद से स्थानांतरण होकर आए पुलिसकर्मियों को आवास पाने के लिए परेशान होना पड़ा रहा है।
जिले में तैनात रहे कई पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण अन्य जनपदाें में हो जाने के बाद आवासों को खाली नहीं कर रहे हैं। पिछले साल कई पुलिसकर्मियों को नोटिस भेजकर खाली कराए जाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आज तक आवास खाली नहीं हो सके। इससे गैर जनपद स्थानांतरण होकर आए पुलिसकर्मियों को आवास पाने के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। शासन के नियमों के अनुसार कार्यक्षेत्र वाले जिले में जिन पुलिसकर्मियों के पास निजी आवास बना हुआ है, ऐसों को आवास आवंटित नहीं हो सकेगा। सरकारी आवास में निवास करते हुए भी अगर वह अपना मकान बनाता है तो भी विभाग को इसकी जानकारी देनी होती है। ऐसी स्थिति में भी उसे आवास आवास छोड़ना होता है। इस तरह के नियम को न केवल पुलिस विभाग में ताक पर रख दिया गया है, बल्कि प्रत्येक विभाग के कई पुलिसकर्मी अफसरों के आदेश को भी नहीं मान रहे है।
इस संबंध में एसपी देहात नैपाल सिंह ने बताया कि कई आवास खाली कराए जा चुके हैं। जिन आवासों पर कब्जा है, उनको भी जल्द खाली कराया जाएगा।
बिजली मीटर और पानी बिल तक नहीं भरते
आवासों में तबादला होने के बाद भी रहने वाले कई पुलिसकर्मी अपने आवासों में लगे बिजली और पानी का बिल तक नहीं भरते। कारण स्पष्ट होता है कि उन्हें आज नहीं तो कल इन आवासों को खाली करना है। वर्दी के रौब में इनके बिजली कनेक्शन भी विभाग आसानी से काट नहीं पाता। अगर इनके मीटर कनेक्शन काट भी दिए जाते हैं तो पुन: अवैध रूप से जोड़ लिए जाते हैं। कई बार बिजली विभाग के छापे में यह उदाहरण देखने को मिलते रहे हैं। ऐसी स्थिति में मकान में रहने वाले नए कर्मचारी को बिजली और पानी के कनेक्शन जुड़वाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नियमानुसार ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर बकाया बिल की राशि का भुगतान उनके वेतन से राशि काटकर कराया जाना चाहिए।