झांसी। हरी सब्जियों का सेवन कितना फायदेमंद होता है, यह बात किसी से छुपी नहीं है। अक्सर सलाद के तौर पर कच्ची सब्जियों के सेवन की सलाह दी जाती है। मगर ज्यादा चमकदार और ताजा दिखाने के लिए सब्जियों को सिंथेटिक रंगों से रंगकर बाजार में बेचा जा रहा है, जो कि सेहत के खिलाफ काफी नुकसानदेह है। इसके सेवन से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। जिम्मेदार भी कभी-कभार अभियान चलाकर इतिश्री कर लेते हैं। पिछले छह महीने से तो सब्जियों की सैंपलिंग तक नहीं हुई है।
सब्जियों में प्रयोग होने वाले जहरीले तत्व स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी खतरनाक होते हैं। लौकी, तरबूज मेें ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाया जाता है, जो इनकी ग्रोथ बढ़ा देता है। खतरनाक रसायन के प्रयोग से तैयार सब्जियों के सेवन से प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। पेट की बीमारी सहित अन्य बीमारियां हो सकती हैं। जानकारों ने बताया कि बाजार सेे लाकर सब्जियों व फलों का सेवन सीधेे नहीं करना चाहिए। इनको अच्छी तरह से धोने केे बाद ही प्रयोग में लाना चाहिए, जिससे इन पर किए जाने वाले कीटनाशक और अन्य विषैैले तत्वों का प्रभाव दूर हो सकेे। बिना धोए इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
ये बीमारियां हो सकतीं
अगर कोई व्यक्ति इन हानिकारक सब्जियों का सेवन करता है, तो उसके फेफड़े, दिमाग, लीवर और किडनी तक खराब हो सकते हैं। वहीं, यह रक्त कोशिकाओं को भी डैमेज कर सकता है। ज्यादा लंबे समय तक सेवन करने से कैंसर का भी खतरा बढ़ सकता है।
इनका होता इस्तेमाल
पेस्टीसाइड : कीटों से बचाव के लिए
तैलीय पदार्थ: चमक लाने के लिए
पेट्रोलियम जेली: ताजगी दर्शाने के लिए
आक्सीटोसिन इंजेक्शन: ग्रोथ बढ़ाने के लिए
तूक्किा प्रयोग: सब्जियों मे हरापन लाने को
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सख्त सजा का है प्रावधान
बार एसोसिएशन के महामंत्री प्रणय श्रीवास्तव ने बताया कि मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने पर सख्त सजा का प्रावधान है। खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम-2006 के तहत मिलावटी खाद्य पदार्थ मिलने पर अधिकतम पांच लाख जुर्माना और आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
कोरोना के चलते लॉकडाउन के बाद सब्जियों के नमूने नहीं लिए गए हैं। इससे पहले लिए गए नमूनों में सब्जियों में रंग की मिलावट मिली थी। अब फिर से सब्जियों के नमूने लेने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
नरेंद्र कुमार, प्रभारी अभिहीत अधिकारी।
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ये बोली जनता
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सभी के फोटो..
आज के समय कुछ भी शुद्ध मिलना बहुत मुश्किल है। सब्जियां खाए बिना तो रह ही नहीं सकते हैं। मिलावट से कहां तक और कैसे बचें, समझ ही नहीं आता। चंद्रप्रकाश, हाइडिल कॉलोनी।
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लोग जरा से मुनाफे के लिए हमें रसायनिक सब्जियां खिलाने तक से गुरेज नहीं कर रहे हैं। जिम्मेदार भी चुप हैं। मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चले। राजीव अग्रवाल, गुसाईंपुरा।