महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बगैर वार्ड बॉय महिला को एक्सरे के लिए भेजने पर सिस्टर इंचार्ज समेत पांच के खिलाफ कार्रवाई की गई है। दो आउटसोर्स कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी गई। इनमें एक स्टाफ नर्स और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी है।
वहीं, सिस्टर इंचार्ज और स्टाफ नर्स का वेतन रोक दिया गया। जबकि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निलंबित कर दिया गया। नौ मई की रात को ही महिला की मौत हो गई थी। यह तस्वीर अमर उजाला के 11 मई के अंक में पेज दो पर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद सुबह नौ बजे प्राचार्य डॉ. मयंक सिंह के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) डॉ. सचिन माहुर महिला सर्जिकल वार्ड पहुंचे। यहां उन्होंने सभी दस्तावेजों की पड़ताल की। सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसके बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई।
इन पर हुई कार्रवाई
सिस्टर इंचार्ज सोनिया कासिफ
स्टाफ नर्स (नियमित) पुष्पा
इनकी आउटसोर्स कर्मियों की सेवा समाप्त
स्टाफ नर्स पूजा भट्ट
चतुर्थ श्रेणी कर्मी लक्ष्मी
इनको किया गया निलंबित
चतुर्थ श्रेणी कर्मी रोशन (नियमित)
नर्सिंग कर्मी बोले... डॉक्टर ने सीधे एक्सरे के लिए भेज दिया
वहीं, पूरे मामले में महिला सर्जिकल वार्ड नं. दो के नर्सिंग कर्मियों ने एक्सरे के लिए भेजे जाने से अनभिज्ञता जताई है। कर्मियों का कहना है कि उन्हें डॉक्टर के माध्यम से एक्सरे के लिए बताया ही नहीं गया। डॉक्टर ने सीधे एक्सरे के लिए भेज दिया।
नौ मई रात को महिला की हो गई थी मौत
मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग कर्मियों ने बताया कि महिला को नौ मई की सुबह ऑपरेशन के लिए भेजा था मगर लौटा दिया गया। रात को फिर उसे ऑपरेशन के लिए ओटी भेजा मगर वह लौटकर नहीं आई। ओटी में तबीयत बिगड़ने पर उसे इमरजेंसी भेज दिया गया, देर रात उसकी मौत हो गई।
यह है मामला
मध्य प्रदेश के छतरपुर के राजू नायक की पत्नी शकुंतला को तीन मई को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। उन्हें आंत में संक्रमण था। जांच के बाद ऑपरेशन के लिए वार्ड नं. दो के बेड नंबर तीन पर भेज दिया गया। परिजन ने बताया कि हालत में सुधार होने लगा था।
फिर आठ मई को महिला को खून चढ़ाया गया। इसी दिन एक्सरे के लिए बिना वार्ड बॉय के महिला को रेडियोलॉजी विभाग में ले जाने के लिए कहा गया। फिर महिला के साथ मौजूद उसके नौ साल के बेटे सौरभ को खून की थैली पकड़ा दी गई। पति राजू स्ट्रेचर को खुद खींचकर वार्ड तक ले गए।
खून चढ़ने के दौरान मरीज को जांच के लिए भेजना पूरी तरह से गलत है। शुरुआती जांच में दोषी पाए गए कर्मियों पर कार्रवाई की गई है। अभी मामले की जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
- डॉ. सचिन माहुर, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज, झांसी
बगैर वार्ड बॉय के रोगी को जांच के लिए भेजना गलत है। भविष्य में ऐसा कोई भी मामला मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. मयंक सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज